कॉलेज का सीलबन्द कमरा खोलने के बाद चोरी का रहस्योद्घाटन
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। स्थानीय प्रशासन की उपस्थित में 7 फरवरी को सारण जिला के हद में सोनपुर में स्थापित एक मात्र डिग्री कॉलेज पूर्वोत्तर रेलवे महाविद्यालय का आठ माह बाद सीलबंद कमरों का ताला खोला गया। सीलबंद कमरों को खोलते हीं गजब का दृश्य देखने को मिला।
कॉलेज के प्राचार्य विनय कुमार सिंह का आरोप है कि प्रयोगशाला कक्ष का दरवाजा खोला गया तो सभी सामान गायब पाए गए। जो सामान बचा पाया गया, वह भी क्षतिग्रस्त था। प्राचार्य के अनुसार अनुमान लगाया गया है कि लगभग करोड़ों की संपत्ति की चोरी की गयी है।
यह तो वाकई में किसी फिल्मी पटकथा या किसी शातिर हीस्ट जैसा मामला लग रहा है। सोनपुर के पूर्वोत्तर रेलवे महाविद्यालय की यह घटना सील बंद डिब्बा से सामान गायब वाली कहावत का एकदम सटीक और गंभीर उदाहरण है। खास यह कि जब प्रशासन किसी कमरे को सील करता है, तो उसका कानूनी और सुरक्षात्मक अर्थ यही होता है कि वह स्थान पूरी तरह सुरक्षित है। ऐसे में ताला खोलने पर सामग्री का न मिलना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
इस मामले के कुछ मुख्य बिंदु जो ध्यान खींचते हैं उसमें कॉलेज के सुरक्षा पर सवाल उठता है। सील बंद कमरा प्रशासन की निगरानी में होता है। अगर वहां से सामान गायब हुआ है, तो यह बिना किसी अंदरूनी मदद अथवा भारी लापरवाही के संभव नहीं है।
इससे योजनाबद्ध तरीके का संकेत भी मिलता है। लाखों की सामग्री रातों-रात गायब नहीं होती। इसके लिए समय और संसाधनों की ज़रूरत पड़ती है, जो दर्शाता है कि यह सिर्फ चोरी नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश हो सकती है। यह सुरक्षा व्यवस्था में भारी चूक की ओर इशारा भी कर रहा है। सीलबंद कमरा प्रशासन की निगरानी में होता है। अगर वहां से सामान गायब हुआ है, तो यह बिना किसी अंदरूनी मदद या भारी लापरवाही के संभव नहीं है। लाखों की सामग्री रातों-रात गायब नहीं होती। इसके लिए समय और संसाधनों की ज़रूरत पड़ती है, जो दर्शाता है कि यह सिर्फ चोरी नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश हो सकती है।
कॉलेज के प्राचार्य ने लिखित वक्तव्य जारी कर कहा है कि महाविद्यालय के सभी कमरों का पंखा, कुर्सी, प्राचार्य कक्ष के सोफा, कुर्सी, टेबुल इत्यादि सभी चोरी कर लिए गए। हॉल की सारी कुर्सियां, पानी पीनेवाला दो आरओ, जेनरेटर एवं कार्यालय के सभी कागजात गायब थे।
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