एस. पी. सक्सेना/समस्तीपुर (बिहार)। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (युजीसी) गाईडलाइन को केंद्र सरकार के इशारे पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाये जाने के खिलाफ शैक्षणिक संस्थानों में जातिय भेदभाव खत्म करने, रोहित एक्ट लागू करने आदि मांगों को लेकर आइसा-आरवाईए एवं बहुजन छात्रों द्वारा 13 फरवरी को समस्तीपुर शहर के स्टेडियम गोलंबर से प्रतिरोध मार्च निकाला गया। प्रतिरोध मार्च मांगों से संबंधित नारा लगाते जिला मुख्यालय भ्रमण के बाद कर्पूरी प्रतिमा स्थल पर पहुंचकर सभा में तब्दील हो गया।
सभा की अध्यक्षता आइसा जिलाध्यक्ष लोकेश राज तथा संचालन आइसा जिला उपाध्यक्ष दीपक यदुवंशी ने किया। मौके पर जितेंद्र कुमार सहनी, संजीव कुमार गोलू,अग्रसेन आनंद, सौरभ सतनाम, मो. महफूज, दिपक जोशी, राजेश प्रजापति, मोनू कुमार, अंशु कुमार, अफ़रोज़, रत्नेश कुमार, सुजीत सम्राट, समीर कुमार समेत भीम आर्मी के एनामूल हुसैन, संजीत कुमार, आइसा-आरवाईए जिला प्रभारी सह भाकपा माले जिला कमिटी सदस्य सुरेंद्र प्रसाद सिंह, भाकपा माले के दीनबंधु प्रसाद, राज कुमार चौधरी, राजद के जगदीश चौपाल, राम विनोद पासवान, कांग्रेस के विश्वनाथ सिंह हजारी आदि ने संबोधित किया।
इस अवसर पर अपने अध्यक्षीय संबोधन में आइसा जिलाध्यक्ष लोकेश राज ने कहा कि जब ईडब्ल्यूएस लाया गया तो कोई पीआईएल दाखिल नहीं हुआ। संविधान से परे जाकर 10 प्रतिशत आरक्षण लागू कर दिया गया, लेकिन जब यूजीसी लाया गया तो जान बूझकर केंद्र की मोदी सरकार के इशारे पर पीआईएल दाखिल किया गया। मामले की सुनवाई भी हुई और इस पर रोक लगा दिया गया। यह बहुजनों के साथ अन्याय है और इसे लागू किए जाने तक संघर्ष जारी रहेगा। आइसा जिला उपाध्यक्ष दीपक यदुवंशी ने यूजीसी पर रोक लगाये जाने के मामले को लेकर स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी समेत गांव-टोले में छात्रों को गोलबंद का संघर्ष चलाने का शंखनाद किया।
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