आरसीएमयू के प्रयास से स्व सुभाष बाउरी के पत्नी को मिला मोनेटरी कंपनसेशन का पत्र
एस. पी. सक्सेना/बोकारो। सीसीएल प्रबंधन की खेल निराली है। जबतक न्याय के लिए लगातार संघर्ष नहीं किया जाता है तबतक यहां न्याय की आशा करना बेमानी होगी। आख़िरकार लगातार तेरह वर्षो के लंबे संघर्ष के परिणाम स्वरूप बोकारो जिला के हद में सीसीएल कथारा क्षेत्र के गोबिंदपुर परियोजना के मजदूर स्वर्गीय सुभाष बाउरी की विधवा को आंशिक न्याय मिला।
जानकारी के अनुसार सीसीएल कथारा क्षेत्र के गोविंदपुर परियोजना में कार्यरत सुभाष बाउरी का निधन 29 मई 2009 में दुर्घटना के कारण हो गया था। बाउरी के निधन के बाद उनकी पत्नी द्वारा 9.3.0 के तहत नियुक्ति हेतु परियोजना को पत्र प्रेषित किया गया।
प्रेषित पत्र के आलोक में परियोजना तथा क्षेत्र से आवश्यक कार्रवाई कर सीसीएल मुख्यालय अग्रसारित किया गया था। सीसीएल मुख्यालय द्वारा आश्रित पत्नी आला देवी को नियुक्ति पत्र दिया गया। साथ ही उसकी पदस्थापना ढोरी क्षेत्र में की गई थी।
नियोजन मिलने के बाद चिकित्सा परीक्षण में आला देवी को मेडिकली अनफिट कर दिया गया। उसके बाद विधवा आला देवी के द्वारा अपने आश्रित पुत्र जीतन बाउरी को नौकरी देने के लिए प्रबंधन को आग्रह पत्र दी गयी।
बताया जाता है कि आला देवी के द्वारा दिए गये आग्रह पत्र को प्रबंधन द्वारा अस्वीकार किया गया। साथ ही कहा गया कि नियोजन ट्रांसफरेबल नहीं हो सकता है। इसके बाद आला देवी ने अपनी फरियाद इंटक व राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर यूनियन (आरसीएमयू) के कथारा क्षेत्रीय अध्यक्ष अजय कुमार सिंह के समक्ष अपनी आपबीती सुनाते हुए मामले की जानकारी दी।
सिंह ने संगठन द्वारा आश्रित पुत्र को नौकरी दिए जाने का प्रबंधन के ऊपर दबाव बनाया गया। जब मामले का निपटारा संभव नहीं हो सका तो नियोजन के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया।
मामले को हाईकोर्ट में देखकर सीसीएल प्रबंधन ने उच्च स्तरीय समझौता के तहत स्वर्गीय बाउरी के आश्रित पत्नी को मॉनेटरी कंपनसेशन दिए जाने पर अपनी सहमति प्रदान की। साथ ही उसके प्रस्ताव को नवंबर 2019 से लागू करने का पत्र 10 अगस्त को प्रबंधन द्वारा सुभाष बाउरी की पत्नी आला देवी को सौंपा गया।
इस संबंध में मजदूर नेता अजय कुमार सिंह ने कहा कि प्रबंधन का यह निर्णय जल्दी बाजी का निर्णय है। प्रबंधन का निर्णय पुनर्विचार के योग्य है। कारण कि पूर्व में प्रबंधन इस तरह के मामले पर मेडिकली अनफिट होने पर दूसरे आश्रित को भी नौकरी देने का कार्य किया है। वही आला देवी के मामले पर प्रबंधन का निर्णय पक्षपात पूर्ण है।
प्रबंधन या तो आश्रित पुत्र को नौकरी दें अथवा सुभाष बाउरी के मृत्यु के तिथि से परिवार को मॉनेटरी कंपनसेशन दे। सिंह ने कहा कि यह तो अभी पड़ाव है, लेकिन सही अधिकार मिलने तक संगठन के माध्यम से प्रयास निरंतर जारी रहेगा।
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