प्रहरी संवाददाता/रांची (झारखंड)। झारखंड की राजधानी रांची (Jharkhand capital Ranchi) के अरगोड़ा थाना के हद में ट्वीन टावर में रहने वाले ललित मोहन (Lalit mohan) ने अपने पड़ोसी के उपर कोरोना इलाज के नाम पर 10 लाख रूपये ठगी का आरोप लगाया है। उन्होंने ठगी का आरोप लगाते हुए अरगोड़ा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है।
बताया जाता है कि बीते माह 10 अप्रैल को पीड़ित ललित मोहन ने कोरोना रोधी वैक्सीन लिया था। उसके बाद उन्हें बुखार रहने लगा। दो-तीन दिन दवा लेने के बावजूद बुखार नहीं छोड़ रहा था। पीड़ित की पत्नी ने पड़ोसी अजीत की पत्नी से मदद मांगी।अजीत कुमार ने 13 अप्रैल को डॉक्टर राजेश प्रसाद को घर बुलाया डॉक्टर के कुछ दवाई दी लेकिन 1 दिन बाद 14 अप्रैल तक भी बुखार जाने का नाम नहीं ले रहा था। अजीत ने फिर डॉक्टर को बुलाया और डॉक्टर ने कुछ जांच लिखते हुए ब्लड सैंपल लेने के लिए नर्स को बुलवाया। उसके बाद से ललित मोहन से ठगी का सिलसिला शुरू हुआ। उसके बाद अजीत पीड़ित की पत्नी से एक लाख रुपया लेकर तुपुदाना के आरोग्यम अस्पताल में इलाज के लिए पीड़ित को भर्ती कराया गया। उसके बाद प्रतिदिन ललित मोहन की पत्नी से एक लाख रुपए इलाज के नाम पर लिया जाता रहा। ठीक होने के बाद ललित मोहन को जब इस बात का पता चला तो उसके होश उड़ गए। उसके इलाज के नाम पर उसकी पत्नी से तकरीबन 11 लाख 55 हजार रुपए लिए गए हैं। उन्होंने पड़ोसी अजीत कुमार के खिलाफ 10 लाख रुपये की ठगी का आरोप लगाते हुए अरगोड़ा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि उनके पड़ोसी ने कोरोना के इलाज के नाम पर ठगी की है।
पीड़ित ललित मोहन ने पुलिस को दिए शिकायती पत्र में कहा है कि उन्होंने 10 अप्रैल को कोरोना रोधी टीका लिया था। इसके बाद उन्हें बुखार रहने लगा। 12 व 13 अप्रैल को दवा लेने के बाद भी बुखार कम नहीं हुआ। इसके बाद पत्नी ने पड़ोसी अजीत की पत्नी से संपर्क साधा। अजीत कुमार ने 13 अप्रैल को डॉक्टर राजेश प्रसाद को घर बुलाया और उनका इलाज करवाया। दवाइयों के बावजूद 14 अप्रैल को भी बुखार कम नहीं हुआ। इसके बाद अजीत ने फिर डॉक्टर को बुलाया। डॉक्टर ने कुछ जांच लिख दिया। अजीत ने ब्लड सैंपल लेने के लिए एक नर्स को बुलाया। ललित मोहन ने आरोप लगाया है कि अजीत ने ऑक्सीजन के नाम पर 22 हजार 500 रुपये, ऑक्सीजन फ्लो मीटर लगाने वाले के नाम पर पांच हजार रुपये दिलाया। ऑक्सीजन का स्तर घटने पर अजीत ने उसे तुपुदाना स्थित आरोग्यम अस्पताल में भर्ती कराया। यहां भर्ती के लिए उसने ललित की पत्नी से एक लाख रुपये लिए। इसके बाद वह प्रतिदिन इलाज के नाम पर एक-एक लाख रुपये लेता रहा। जब वह ठीक होकर घर लौटा तो पता चला कि उसके इलाज के नाम पर लाखों रुपये का कर्ज उनके परिचितों से लिया गया है। उन्होंने यह भी बताया है कि रेमडेसिविर इंजेक्शन के दो डोज के नाम पर दो लाख 30 हजार रुपये लिए गए हैं। आरोग्यम अस्पताल ने भी इलाज के नाम पर एक लाख 23 हजार रुपये का बिल बनाया था। दूसरी ओर आरोपी अजीत ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि उन्होंने ललित मोहन की जान बचाई है। बदले में उसपर गलत आरोप लगाया जा रहा है। यानी नेकी कर और दरिया में डाल।
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