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सिबड़ाकुल्ही में आदिवासी सेंगेल की बैठक संपन्न

एस. पी. सक्सेना/बोकारो। आदिवासी समाज अपनी संस्कृति, संस्कार के अलावा जल, जंगल, जमीन की रक्षा को लेकर जगह जगह बैठके कर जन जागरूकता अभियान चला रहे हैं। इसे लेकर 30 अप्रैल को बोकारो जिला के हद में नावाडीह प्रखंड के चपरी पंचायत सिबड़ाकुल्ही में सेंगेल प्रतिनिधियों की एक बैठक आयोजित किया गया।

आदिवासी सेंगेल अभियान चापड़ी पंचायत अध्यक्ष लालजी मुर्मू की अध्यक्षता बैठक में बोकारो सेंगेल जोनल संयोजक आनन्द टुडू ने अपने संबोधन में समाज को तीन संदेश दिया। जिसमें आगामी 30 जून को कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में विश्व सरना धर्म कोड जनसभा से भारत के आदिवासियों के लिए आदिवासी क्रांति का बिगुल फूंका जाएगा।

आदिवासी समाज में सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक क्रांति लाना है। आदिवासी समाज को गुलामी से आजादी दिलाना है। प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा के साथ मानवता की रक्षा में उठ खड़ा होना है। कुछ नया और अच्छा करना है।

टुडू ने कहा कि फ्रांस की क्रांति 1789, संताल क्रांति या हूल – 30 जून 1855 और सफल संताली भाषा मोर्चा आंदोलन 1992 – 2003 को याद कर, समझ कर आत्मसात करना है।

बैठक में कहा गया कि भारत के 7 प्रदेशों – झारखंड, बंगाल, बिहार, उड़ीसा, आसाम, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा के संताल बहुल 350 प्रखंडों के लाखों आदिवासियों की उपस्थिति में 30 जून को 7 लक्ष्यों को सफल बनाने का क्रांति- उद्घोष किया जाएगा।

बैठक में कहा गया कि वर्ष 2023 में हर हाल में सरना धर्म कोड लागू कराना हैं। मरांग बुरू (पारसनाथ पहाड़) को जैनों के कब्जे से मुक्त कराना हैं। झारखंड प्रदेश को अबोआ दिशोम -अबोआ राज पुनर्स्थापित करना है। झारखंड में संताली भाषा को राजभाषा का दर्जा दिलाना और अन्य आदिवासी भाषाओं को समृद्ध करना है।

असम, अंडमान के झारखंडी आदिवासियों को एसटी का दर्जा दिलाना है। कुर्मीयों को एसटी बनाने की अनुशंसा करने वाली सभी पार्टियों और सरकारों का विरोध करना करना है। ट्राइबल सेल्फ रुल सिस्टम (आदिवासी स्वशासन व्यवस्था) में जनतांत्रिक और संवैधानिक सुधार लाना है।

बैठक में कहा गया कि फिलवक्त झारखंड मुक्ति मोर्चा और उसके सहयोगी संगठन माझी परगना महाल, असेका और कुछ एक संताली लेखक संघ आदि मिलकर आदिवासी समाज को बर्बादी के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है।

अतः आदिवासी समाज को इनके वादाखिलाफी और गलत क्रियाकलापों से सावधान कराना भी जरूरी है। अन्यथा आदिवासी गांव- समाज के रहिवासी सच और झूठ, सही और गलत को समझ नहीं पाएंगे। नासमझी में अपनी बर्बादी खुद करते रहेंगे।

बैठक में सेंगेल नावाडीह प्रखंड सेंगेल संयोजक सुखिलाल टुडू, चपरी सेंगेल महिला मोर्चा संयोजक अनिता मुर्मू, ग्रामीण सेंगेल टॉवर सावित्री मुर्मू, फूलचंद किस्कू, राजेश किस्कू, राजेन्द्र किस्कू, सुनील किस्कू, बिरबाल सोरेन, सुनील मार्डी, सुशील मार्डी, ममता मुर्मू, मूर्ति मुर्मू, मालती मुर्मू, निर्मल किस्कू, अनिल मार्डी आदि उपस्थित थे।

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