फिरोज आलम/जैनामोड़ (बोकारो)। आदिवासी सेंगेल अभियान के आह्वान पर भारत के पांच प्रदेशों (झारखंड, बिहार, बंगाल, उड़िसा और असम) के 50 जिला मुख्यालयों में मारांग बुरु को बचाने, सरना धर्म कोड हर हाल में 2023 में लागू करने और आदिवासी अधिकारों को लागू करने को लेकर एक दिवसीय मशाल जुलूस निकाला गया। इसी संदर्भ में बोकारो जिला मुख्यालय सेंगेल झारखंड प्रदेश अध्यक्ष देवनारायण मुर्मू के नेतृत्व में भी मशाल जुलूस निकाला गया।
मशाल जुलूस बोकारो हवाई अड्डा से उपायुक्त कार्यालय तक नारा लगाते हुए पैदल मार्च किया गया। यहां राज्यपाल के नाम ज्ञापन पत्र बोकारो डीसी के मार्फत सुपुर्द किया गया।
इस अवसर पर सेंगेल नेता एवं कार्यकर्ताओ ने सरना धर्म कोड 2023 में लेना होगा, देना होगा। नहीं तो रेल/रोड चक्का जाम होगा।
मारांग बुरु आदिवासी को वापस करना होगा, नहीं तो रेल/रोड चक्का जाम होगा। पारसी जितकारिया दिशोम गोमके जिंदाबाद आदि नारा लगाया।
मशाल जुलूस के क्रम में सेंगेल झारखंड प्रदेश अध्यक्ष देवनारायण मुर्मू ने कहा कि भारत के प्रकृति पूजक आदिवासियों को 2023 में हर हाल में सरना धर्म कोड देना है, लेना है। उन्होंने कहा कि चूंकि अधिकांश आदिवासी हिंदू मुसलमान ईसाई आदि नहीं है। वर्ष 2011 की जनगणना में जैन धर्म वाले 44 लाख थे तो सरना धर्म लिखाने वालों की संख्या 50 लाख से ज्यादा थी।
उन्होंने कहा कि झारखंड के पारसनाथ पहाड़ में स्थित आदिवासियों के ईश्वर मरांग बुरु को अविलंब जैनों के कब्जे से मुक्त कराना है और आदिवासियों को सुपुर्द करना है। देश के सभी पहाड़ पर्वतों को आदिवासियों को सौंपा जाए, क्योंकि पहाड़ों में आदिवासियों के देवी देवता रहते हैं।
पहाड़ों की सुरक्षा तथा प्रकृति पर्यावरण क्लाइमेट चेंज की रक्षा आदिवासी समाज कर सकता है। उन्होंने कहा कि झारखंड प्रदेश “अबुआ दिशोम अबुआ राज” है। आदिवासियों का गढ़ है। यहां संविधान, कानून, मानव अधिकारों को लागू कर इसे शहीदों के सपनों को सच बनाना है।
जो आज लूट, झूठ, भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है। उपस्थित अन्य वक्ताओं ने कहा कि झारखंड प्रदेश में एकमात्र बड़ी आदिवासी भाषा- संताली, जो आठवीं अनुसूची में भी शामिल है, को अविलंब झारखंड की प्रथम राजभाषा का दर्जा दिया जाए और बाकी आदिवासी भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए।
कहा गया कि आसाम, अंडमान में भी झारखंडी आदिवासियों को अविलंब एसटी का दर्जा दिया जाए। आदिवासी स्वशासन व्यवस्था या ट्राइबल सेल्फ रूल सिस्टम में जनतंत्र और संविधान को समाहित करते हुए इसमें सुधार लाकर इसे अविलंब समृद्ध किया जाए।
मशाल जुलूस में झारखंड प्रदेश संयोजक करमचंद हांसदा ने कहा कि यदि संबंधित सरकारों द्वारा आदिवासियों के ईश्वर- मरांग बुरु (पारसनाथ पहाड़) जैनों के कब्जे से मुक्त नहीं किया गया अथवा आदिवासियों को सुपुर्द नहीं किया गया, देश भर के पहाड़ पर्वतों को आदिवासियों को नहीं सौंपा गया, तो आदिवासी सेंगेल अभियान अन्य तमाम आदिवासी समाज के सहयोग से आगामी 11 फरवरी से राष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितकालीन रेल/ रोड चक्का जाम को बाध्य होंगे। यह हमारा संवैधानिक अधिकार है।
मशाल जुलूस में ऑल इंडिया माझी परगना मंडवा के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रमोहन मार्डी, बोकारो जोनल हेड अरूण किस्कू, बोकारो जोनल संयोजक आनन्द टुडू, जयराम सोरेन, भीम मुर्मू, कृष्णा किस्कू, संजय किस्कू, सुरेश टुडू, गोपीनाथ मुर्मू, सोनाराम मुर्मू, जलेश्वर किस्कू, आदि।
कोमल किस्कू, गुलाबी पावरिया, सविता टुडू, सरिता मार्डी, सावित्री मुर्मू, करमचंद मुर्मू, नेमचंद मुर्मू, कालीचरण किस्कू, महेश सोरेन, संजूल मुर्मू, मनोज हांसदा, प्रदीप सोरेन, सरीता टुडू, गेंदीया टुडू, शांति टुडू आदि महिला पुरुष शामिल थे।
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