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मानस मर्मज्ञ अच्युतानंद ने प्रभु श्रीराम के अवतरण की अद्भुत कथा सुनाई

प्रहरी संवाददाता/पेटरवार (बोकारो)। पेटरवार प्रखंड के हद में अंगवाली के मैथानटुंगरी में आयोजित श्रीरामचरित मानस महायज्ञ के द्वितीय रात्रि 31 मार्च को रामकथा का आयोजन किया गया।

जानकारी के अनुसार प्रवचन के दौरान उत्तर प्रदेश के वाराणसी से पधारे मानस मर्मज्ञ अच्युतानंद महराज ने भगवान श्रीराम के जन्म व अवतरण के कारणों का बेबाक व्याख्या किया। उन्होंने कहा कि राजा दशरथ के लिए श्रीराम जन्म हुआ, जबकि माता कौशल्या के प्रभु का अवतार हुआ। यह मानस में वर्णित है।

मानस मर्मज्ञ ने स्पष्ट किया कि एक बार नही कई बार राजा दशरथ को संतान न होने की ग्लानि सहनी पड़ी थी। ऐसे तो पूर्व में राजा मनु और शत्रुपा को भगवान वरदान दे चुके थे कि कालांतर में मैं स्वयं आपके पुत्र के रूप में जन्म लूंगा। वही मनु, शत्रुपा राजा दशरश व कौशल्या हैं।

आचार्य पाठक ने इस प्रसंग में श्रीराम के जन्म लेने के अनेक कारणों का विश्लेषण किया।मुख्यरूप से ब्राह्मण, गौ माता, देवता, संत की रक्षा तो दूसरी ओर अपने भक्त वत्सलों के उद्धार के लिए भी धरती पर आए भगवान।

वाराणसी के ही मानस माधुरी साध्वी लक्ष्मी रामायनी ने प्रभु श्रीराम से अधिक उनके नाम की महिमा का कार्मिक ढंग से वखान किया है।कहा कि रत्नाकर डाकू को राम के उल्टा नाम ने डाकू से मुनि वाल्मीकि बना दिया। पत्थरों में राम नाम लिखने से तैरने लगा और विशाल समुद्र में पुल बन गया। इसलिए संसार के प्राणियों को प्रभु के नाम हमेशा याद रखना चाहिए।

सुबह से दुपहर तक व्यास आचार्य अनिल पाठक एवं समूह द्वारा लयबद्ध मानस पाठ कराया गया।काफी संख्या में महिला, पुरुष श्रद्धालु प्रातः से दोपहर तक आयोजन स्थल का परिक्रमा किए।समिति के अध्यक्ष एवं अन्य पदाधिकारी, सदस्य शांति व्यवस्था बनाए रखने में जुटे रहे।

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