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आबादी के अनुसार कुम्हार समाज ने राजनीतिक भागीदारी को लेकर भरी हुंकार

रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। झारखंड प्रजापति (कुम्हार) महासंघ के तत्वावधान में 18 जनवरी को हजारीबाग में कुम्हार अधिकार महारैली का भव्य आयोजन किया गया। महारैली में जिले सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों से हजारों की संख्या में कुम्हार समाज के प्रबुद्ध जनों ने भाग लेकर अपने राजनीतिक, सामाजिक एवं आर्थिक अधिकारों को लेकर एकजुटता का परिचय दिया।

महारैली की अध्यक्षता झारखंड प्रजापति (कुम्हार) महासंघ के हजारीबाग जिलाध्यक्ष नरेंद्र प्रजापति (पप्पू) जबकि संचालन सुखदेव प्रजापति एवं वीरेंद्र प्रजापति ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इसके पश्चात सभी अतिथियों को अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड प्रजापति (कुम्हार) महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष देवनारायण प्रजापति, विशिष्ट अतिथि बेरमो के पूर्व विधायक योगेश्वर महतो उर्फ बाटुल, झारखंड माटी कला बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष श्रीचंद प्रजापति, प्रदेश महासचिव ईश्वर चंद्र प्रजापति, प्रदेश उपाध्यक्ष संजय पंडित, प्रदेश संगठन मंत्री पप्पू पंडित एवं प्रदेश प्रवक्ता विक्रम महतो (कुमार) सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी मंचासीन रहे।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि देवनारायण प्रजापति ने अपने संबोधन में कहा कि झारखंड में कुम्हार समाज की आबादी लगभग 32 लाख है, जो राज्य की कुल जनसंख्या का 8 प्रतिशत है। राज्य के लगभग सभी जिलों, प्रखंडों और पंचायतों में कुम्हार समाज निवास करता है, बावजूद इसके राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक स्तर पर समाज को लगातार उपेक्षित रखा गया है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब कुम्हार समाज अपने अधिकारों के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है। यदि आबादी के अनुपात में राजनीतिक भागीदारी, माटी कला बोर्ड का पुनर्गठन और नीति निर्माण में हिस्सेदारी सुनिश्चित नहीं की गई, तो कुम्हार समाज लोकतांत्रिक तरीके से सरकार और सभी राजनीतिक दलों को जवाब देगा।

पूर्व विधायक योगेश्वर महतो उर्फ बाटुल ने कहा कि झारखंड की 82 विधानसभा सीटों में कुम्हार समाज निर्णायक भूमिका में है। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 7 हजार से 45 हजार तक कुम्हार मतदाता हैं, फिर भी समाज को राजनीतिक हिस्सेदारी नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि अब केवल आश्वासन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। यदि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक भागीदारी समान रूप से सुनिश्चित नहीं हुई, तो कुम्हार समाज आने वाले चुनावों में अपनी ताकत दिखाने से पीछे नहीं हटेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राजनीतिक दलों की होगी।

प्रदेश महासचिव ईश्वर चंद्र प्रजापति ने कहा कि पिछले 78 वर्षों से कुम्हार समाज को योजनाबद्ध तरीके से उसके अधिकारों से वंचित रखा गया है। सभी राजनीतिक दलों ने समाज का उपयोग केवल वोट बैंक के रूप में किया, लेकिन अधिकार देने के नाम पर हमेशा निराशा हाथ लगी। उन्होंने समाज के महिलाओं और युवाओं से आगे आने का आह्वान करते हुए कहा कि अब सहने का समय समाप्त हो चुका है।

उन्होंने पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने तथा नगर निगम, जिला परिषद और पंचायत स्तर पर कुम्हार समाज की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की। प्रदेश उपाध्यक्ष संजय पंडित ने कहा कि समाज की सबसे बड़ी ताकत उसकी एकजुटता और संगठन है। जब तक समाज संगठित नहीं होगा, तब तक अधिकार मिलना संभव नहीं है। उन्होंने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर जोर दिया। प्रदेश संगठन मंत्री पप्पू पंडित ने कहा कि कुम्हार समाज को राजनीतिक अधिकारों के साथ-साथ शैक्षणिक और आर्थिक रूप से सशक्त होना होगा। युवाओं को शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और सामाजिक नेतृत्व में आगे आना चाहिए।

प्रदेश प्रवक्ता विक्रम महतो ने शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा के बिना कोई भी समाज मजबूत नहीं बन सकता। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने और युवाओं से लक्ष्य के साथ पढ़ाई करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जेपीएससी एवं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षाओं में सफल अभ्यर्थियों का सम्मान पूरे समाज के लिए प्रेरणा स्रोत है।

सफल अभ्यर्थियों का सम्मान कार्यक्रम के दौरान झारखंड लोक सेवा आयोग एवं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षाओं में सफल कुम्हार समाज के अभ्यर्थियों को सम्मानित किया गया, जिससे युवाओं में उत्साह देखा गया। महारैली को सफल बनाने में हजारीबाग जिला उपाध्यक्ष लीलाधन प्रजापति, संगठन मंत्री शिवकुमार प्रजापति, संरक्षक विष्णु प्रजापति, महेश प्रजापति, निर्मल प्रजापति, राजेश प्रजापति, जागेश्वर प्रजापति, जोगेंद्र प्रजापति, समाजसेवी सोनू प्रजापति, रामदयाल प्रजापति सहित विभिन्न जिलों व प्रखंडों के पदाधिकारियों की अहम भूमिका रही। कुल मिलाकर कुम्हार अधिकार महारैली ने हजारीबाग से यह स्पष्ट संदेश दिया कि कुम्हार समाज अब अपने हक और अधिकार को लेकर पूरी तरह जागरूक, संगठित और संघर्ष के लिए तैयार है।

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