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“आला रे आला गणपति आला” अनोखी झांकी

थोरवे के घर बल्ला लेकर विराजे गणराया

चौके-छक्के लगा रहे हैं गणाध्यक्ष

मुश्ताक खान/मुंबई। श्रद्धा और भक्ति की कोई सीमा या अंत नहीं होता। श्रद्धालु अपनी कल्पना के अनुकूल ही अपने आराध्यदेव की पूजा अर्चना करते हैं। लगभग दो वर्षों के अंतराल के बाद इस बार महाराष्ट्र सहित पूरे देश में श्रद्धालुओं को “गणेशोत्सव” का पर्व मनाने का मौका मिला है।

कोरोनाकाल के बाद यह पहला अवसर है कि मुंबई सहित महाराष्ट्र की जनता के घर आराध्यदेव का आगमन हुआ है। इस बार के गणेशोत्सव में नई-नई झांकियां देखने को मिल रही है। इनमें मनसे वाहतूक सेना, महाराष्ट्र के महासचिव माउली थोरवे के निवास पर गणपति बप्पा अनोखे रूप में पधारे हैं।

चेंबूर कैंप (Chembur Camp) स्थित तोलाराम नगर में विराजे बप्पा के हाथों में क्रिकेट का बल्ला है और वे स्वयं नवी मुंबई के डी वाय पाटील स्टेडियम बल्ला लेकर चौके-छक्के मारने के लिए तैयार खड़े हैं।।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) वाहतूक सेना, महाराष्ट्र के महासचिव माउली थोरवे (General Secretary of Maharashtra Mauli Thorwe) ने बताया की उनका इकलौता बेटा वैभव माउली थोरवे है। उसे क्रिकेट से बेहद लगाव है और वह नवी मुंबई के डी वाय पाटील स्टेडियम में ट्रेनिंग ले रहा है।

उसकी इच्छा को देखते हुए माउली थोरवे ने मूर्तिकार रुपेश जाधव और स्टेडियम की सजावट के लिए प्रदीप आर्ट्स के सोमनाथ जाविर की मदद से सारी तैयारियां की हैं। झांकी में दिखाया गया है कि गणपति बप्पा के हाथो में क्रिकेट का बल्ला है और वे स्वयं नवी मुंबई के डी वाय पाटील स्टेडियम बल्ला लेकर न केवल खड़े हैं, बल्कि अपने भक्तों को आशीर्वाद भी दे रहे हैं।

अब अनोखी झांकी देखने के लिया श्रद्धालु थोरवे के घर पहुंचने लगे हैं। पिछले 12 वर्षों से थोरवे परिवार द्वारा 10 दिनों की गणपति बैठाई जाती है। इस दौरान थोरवे परिवार के साथ पास पड़ोस के लोग आरती में शामिल होते हैं। दस दिनों तक चलने वाले गणेशोत्सव के दौरान घर का हर सदस्य पूजा अर्चना में लीन रहता है।

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