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वैशाली जिले में वोटर लिस्ट पुनरीक्षण कार्य में आधार और राशन कार्ड मान्य नहीं

गंगोत्री प्रसाद सिंह/हाजीपुर (वैशाली)। बिहार विधानसभा का चुनाव इस वर्ष सितंबर व् अक्टूबर माह में संभावित ह। इसको लेकर भारत निर्वाचन आयोग ने बिहार में वर्ष 2003 के मतदाता सूची के आधार पर वोटर लिस्ट में पुनरीक्षण का आदेश दिया है।

इस क्रम में 29 जून को वैशाली की जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने अपने कार्यालय कक्ष में प्रेस वार्ता कर बताया कि आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर वोटर लिस्ट को सौ फीसदी शुद्ध बनाने के लिए भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर वोटर लिस्ट का सघन पुनरीक्षण कार्य शुरु कर दिया गया है।

जिलाधिकारी ने बताया कि नये वोटर लिस्ट का अंतिम प्रकाशन आगामी 30 सितंबर को किया जायेगा। इससे पहले 26 जुलाई तक बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने का फार्म बांटा जायेगा। साथ हीं वोटरों को फार्म भरने में सहयोग किया जायेगा। इसके बाद बीएलओ द्वारा फार्म का कलेक्शन किया जायेगा।

जिलाधिकारी ने बताया कि फार्म व आयोग के सूचीबद्ध किए गए 11 दस्तावेजों में एक के साथ आगामी 31 जुलाई तक निर्वाचन आयोग के डिजिटल प्लेटफार्म पर अपलोड करेंगे। उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट के प्रारुप का प्रकाशन एक अगस्त को किया जायेगा, जबकि एक अगस्त से एक सितंबर तक दावा और आपत्ति लिया जायेगा। वही 25 सितंबर से 27 सितंबर तक दावा और आपत्ति का निष्पादन किया जायेगा। नये वोटरलिस्ट का अंतिम प्रकाशन 30 सितंबर को किया जायेगा।

उन्होंने बताया कि इस कार्य में बूथ लेबल आफिसर की भूमिका अहम है, क्योंकि उन्हें अपने-अपने निर्धारित क्षेत्रों में घर-घर जाकर मतदाता सूची में नाम दर्ज करने की जानकारी देनी है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि मतदाता सूची में दर्ज व्यक्ति जीवित है, वह उस पते पर निवास करते है और वे मतदान योग्य है। इसके तहत भारत निर्वाचन आयोग्य में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पात्रता से संबंधित बीएलओ के माध्यम से डाटा भी अपलोड किया जाएगा।

बीएलओ इन्यूमेरेशन फार्म भरने के संबंध में मतदाताओं को मार्गदर्शन भी देंगे। इस दौरान बीएलओ तीन बार मतदाताओं के घरों का निरीक्षण करेंगे। अगर तीनों बार बीएलओ को मतदाता नहीं मिलते हैं तो उनका नाम ड्राफ्ट सूची से हटा दिया जाएगा। जिलाधिकारी ने बताया कि पिछली बार गहन मतदाता पुनरीक्षण वर्ष 2003 में किया गया था। उसके बाद राज्य में शहरीकरण, सूचना का समय पर अद्यतन न होना तथा फर्जी और विदेशी नागरिकों के नाम सूची में दर्ज होने जैसी समस्याएं सामने आई। ऐसे में आयोग ने एक बार फिर पूरे राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण कराने का निर्णय लिया है। दिए गए कार्यक्रम के अनुसार आगामी एक जुलाई की अर्हता तिथि के आधार पर पुनरीक्षण कार्य किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) प्रत्येक घर तक पहुंचेंगे और दो प्रतियों में इन्यूमरेशन फॉर्म वितरित करेंगे।

मतदाता चाहें तो इस फॉर्म के साथ अपने दस्तावेज ऑनलाइन भी अपलोड कर सकते हैं। बीएलओ इन फार्मो को दस्तावेजों के साथ इकट्ठा करेंगे और ईसीआईएनईटी पोर्टल पर अपलोड करेंगे। प्रत्येक फॉर्म पर बीएलओ को सिफारिश देनी होगी। बीएलओ पर्यवेक्षक इनकी गुणवत्ता एवं संख्या की जांच करेंगे। इसके बाद एईआरओ द्वारा गैर-अनुशासित फॉमों का सत्यापन किया जाएगा। बीएलए की मौजूदगी से किसी भी प्रकार की त्रुटि को प्रारंभिक चरण में ही सुधारा जा सकेगा, जिससे आपत्तियों और अपीलों की संख्या में कमी लाई जा सके।

जिलाधिकारी ने कहा कि जो मतदाता इस बीच मतदाता सूची में अपने नाम का नवीकरण नहीं करा सकेंगे, उन्हें बाद में फार्म-6 में अपना डिटेल्स भर कर बीएलओ के पास जमा करना होगा। बताया कि मतदाताओं को गहन पुनरीक्षण के लिए भौतिक रूप से उपस्थित रहना जरूरी है। निर्वाचन आयोग ने यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि वृद्ध, दिव्यांग जन, बीमार, गरीब और वंचित तबकों के मतदाताओं को किसी प्रकार असुविधा न हो। आयोग का जोर इस बात पर है कि एक भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से बंचित न रहे।

जिलाधिकारी सिंह ने बताया कि वर्ष 2003 में जारी मतदाता सूची को ध्यान में रखकर गहन पुनरीक्षण कार्य किया जाएगा। जिन मतदाता का जन्म एक जुलाई 1987 से पूर्व भारत में हुआ है, उन्हें अपने जन्म की तिथि एवं स्थान की सत्यता स्थापित करने हेतु केवल अपना वांछित दास्तावेज की स्व अभिप्रमाणित प्रति भरे हुए फार्म के साथ देना है। जिस मतदाता का जन्म एक जुलाई 1987 एवं 2 दिसंबर 2024 के बीच भारत में हुआ है, उन्हें अपना और अपने माता-पिता में किसी एक का वांछित दास्तावेज की स्व अभिप्रमाणित प्रति भरे हुए फार्म के साथ जमा करना होगा। 2 दिसम्बर 2004 के बाद के मतदाताओं को अपने साथ-साथ अपने माता-पिता दोनों का पहचान पत्र देना होगा। पहचान पत्र के रूप में आधार कार्ड एवं राशन कार्ड मान्य नहीं होगा।

प्रेस वार्ता में बताया गया कि वोटर लिस्ट पुनरीक्षण कार्य इसलिए किया जा रहा है, ताकि डुप्लिकेट वोटर कार्ड को डिलीट किया जा सके। अगर कोई वोटर चालाकी से अपने नाम और अन्य जानकारी छिपाते हुए दूसरे राज्य में भी अपना वोटर कार्ड बनवा लेता है तो उसे पकड़ में लाया जा सकेगा। ऐसे तमाम डुप्लिकेट वोटर कार्ड को वोटर लिस्टों से डिलीट किया जाएगा। जिलाधिकारी ने वोटर पुनरीक्षण कार्यक्रम में जागरुकता लाने के लिए 29 जून को जिले के कई स्थानों पर स्वयं भ्रमण भी किया।

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