नटवर साहित्य परिषद की कवि गोष्ठी में सजी गीत- ग़ज़लों की महफ़िल

एस. पी. सक्सेना/मुजफ्फरपुर (बिहार)। मुजफ्फरपुर शहर के भगवान लाल स्मारक पुस्तकालय भवन स्थित नवयुवक समिति सभागार में 26 मई को नटवर साहित्य परिषद की ओर से मासिक कवि गोष्ठी सह मुशायरा का आयोजन किया गया।

उक्त जानकारी देते हुए मुजफ्फरपुर की युवा कवियित्री सविता राज ने बताया कि आयोजित कवि गोष्ठी की अध्यक्षता डाॅ जगदीश शर्मा, मंच संचालन सुमन कुमार मिश्र व धन्यवाद ज्ञापन नटवर साहित्य परिषद के संयोजक डॉ नर्मदेश्वर प्रसाद चौधरी ने किया।

उन्होंने बताया कि कवि गोष्ठी की शुरुआत आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री की रचनाओं से किया गया। इसके बाद मुस्कान केशरी ने मैं कौन हूं क्या हूं मैं जानती हूँ सुनाकर तालियां बटोरी। रामबृक्ष राम चकपुरी ने सियासी शख्सियतों की पुरखों की माटी से जरा सा मोहब्बत नहीं है सुनाया।

सत्येन्द्र कुमार सत्येन ने भोजपुरी में एक दिन आइल रहे इयाद सांवर गोरिया, न सुधी नाहीं मन के हमार सांवर गोरियां सुनाया। शायर डॉ नर्मदेश्वर मुजफ्फरपुरी ने धीरे धीरे वो घूँघट उठाने लगे, धड़कने मेरे दिल की बढ़ाने लगे सुनाकर भरपूर दाद बटोरी।

कवि गोष्ठी में साहित्यकार सुमन कुमार मिश्र ने अब वैसी बरसात नहीं सुनाया। डाॅ जगदीश शर्मा ने तीखी घूप ने झुलसाया है, गोरा बदन कोमल चेहरा सुनाया। अरुण कुमार तुलसी ने युग परिवर्तन आया है ‘ सुनाया। सहज कुमार ने क्यों सो रहा है हमारा हिमालय सुनाया। दीनबंधु आजाद ने तरसती नजरों ने हर पल, तेरा साथ मांगा कविता प्रस्तुत की।

नरेन्द्र मिश्र ने भूख नहीं है प्यास नहीं है सुनाया। ओमप्रकाश गुप्ता ने उतरेगा मुखौटा, सच आयेगा सामने सुनाया। गोष्ठी में कवियित्री सविता राज ने गजल हम न कच्चे मकान थे मगर दोस्तो, अपने अंदर हमेशा ही ढ़हते रहे सुनाई। अंजनी कुमार पाठक ने धूप में हम झुलसते रहे सुनाया। इसके अलावे कवि गोष्ठी में कवि सुरेन्द्र कुमार, मुन्नी चौधरी आदि की रचनाएं सराही गई।

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