गंगोत्री प्रसाद सिंह/हाजीपुर (वैशाली)। वैशाली जिले के तीन अनाथ बच्चों को 27 जनवरी को उनका पालक माता पिता मिल गया। पलकों को जिलाधिकारी ने बच्चों को सौंप दिया।
जिला बाल संरक्षण इकाई वैशाली के द्वारा संचालित विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान में आवासित दो बालक एवं एक बालिका को जिलाधिकारी वैशाली यशपाल मीणा के द्वारा तीन दम्पत्तियों को दत्तक ग्रहण पूर्व पालक देख रेख में दिया गया। जानकारी के अनुसार तीनों अनाथ बच्चे लगभग 4 माह पूर्व परित्यक्त अवस्था में पाए गये थे।
उनके जैविक माता-पिता की खोज करने हेतु समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशन करवाया गया था, परंतु उनके माता-पिता का पता नहीं चल पाया। तत्पश्चात उसे महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार के एडॉप्शन की साइट पर पंजीकृत करवा दिया गया।
बालकों को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा जारी दत्तक ग्रहण मार्गदर्शिका 2022 के प्रावधानों के आलोक में समस्त प्रक्रिया पूर्ण कर दत्तक ग्रहण हेतु प्रदान किया गया है।
बताया जाता है कि तमिलनाडु के दो दंपत्तियों तथा दिल्ली के एक दम्पत्ति को पंजीकरण के लगभग 3 वर्ष बाद उनकी बारी आने पर वेबसाइट के माध्यम से ईमेल पर सूचना दी गई। उनके द्वारा बालक को दत्तक ग्रहण में लेने हेतु सहमति दी गई। इसके पश्चात 27 जनवरी को दत्तक ग्रहण कमिटी की बैठक में दम्पत्ति के द्वारा समर्पित प्रमाण पत्रों एवं दत्तक ग्रहण हेतु उनके अभिरुचि की जांच की गई और उन्हें दत्तक ग्रहण के लिए उपयुक्त पाया गया।
इसके बाद जिला दंडाधिकारी के न्यायालय में कोर्ट ऑर्डर के लिए आवेदन किया जाएगा। जिलाधिकारी मीणा द्वारा दत्तक ग्रहण आदेश जारी करने के पश्चात ही दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया पूर्ण होगी। जिलाधिकारी द्वारा बच्चों को उपहार भी प्रदान किया गया। इस अवसर पर सहायक निदेशक जिला बाल संरक्षण इकाई वैशाली, बाल संरक्षण पदाधिकारी, दत्तक ग्रहण संस्थान की समन्वयक तथा अन्य कर्मी उपस्थित थे।
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