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चलकरी आदिवासी टोले में जगह जगह सोहराय की धूम

समूह बनाकर महिला, पुरुष मांदर की थाप पर जमकर थिरके

प्रहरी संवाददाता/पेटरवार (बोकारो)। हिंदी कैलेंडर के अनुसार अगहन मास की समापन यानि धान की कटाई, मिसाई समाप्त होने के उपरांत आदिवासी समाज द्वारा चार दिवसीय सोहराय पर्व पारंपरिक तरीके से मनाया जाता है। इसकी शुरुआत हो चुका है। आदिवासी महिला, पुरुष सोहराय पर्व जगह जगह मनाने लगे हैं। आदिवासी बहुल क्षेत्रों में इस मनोरम दृश्य को देखा जाने लगा है।

जानकारी के अनुसार बोकारो जिला के हद में पेटरवार प्रखंड के विभिन्न पंचायतों में नववर्ष पर क्रमवार यह पर्व मनाया जा रहा है। इस कड़ी में चलकरी दक्षिणी के कई टोलों की में सोहराय पर्व हर्सोल्लास के साथ मनाया जा रहा है।

बताया जाता है कि चलकरी के नावाडीह टोला में 5 जनवरी को आदिवासी समाज के दर्जनों महिला, पुरुष समूह बनाकर मांदर की थाप पर खूब नाची तथा थिरकी।

यहां नेहा हांसदा के नेतृत्व में छूटी कुमारी, रिंकी सोरेन, सुनीता सोरेन, बबीता देवी, दिव्यांशु कुमारी, सोनिया कुमारी, रूपणी देवी, ममता कुमारी आदि ने पारंपरिक वेश, भूषा में प्रकृति से संबंधित संथाली भाषा में अनेकों गीत गाकर काफी देर तक सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया। वहीं स्थानीय रहिवासी नागेश्वर सोरेन, निर्मल सोरेन, दिनेश किस्कू, धनीराम सोरेन, रामप्रसाद सोरेन ने मांदर, नगाडे की ताल ठोंकने की भूमिका निभाई। मुहल्ले के रहिवासी दर्शक के तौर पर यहां उपस्थित थे।

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