श्रमिक आवासीय काॅलोनी के छत का छज्जा गिरा, बाल बाल बचे सीसीएल कर्मी
एस. पी. सक्सेना/बोकारो। बामुश्किल अभी बोकारो जिला के हद में सीसीएल कथारा क्षेत्र के रेलवे काॅलोनी के ब्लाक नबंर तीन मे कायाकल्प योजना के तरह मरम्मती कार्य हुए लगभग तीन वर्ष ही गुजरे होंगे।
इसी बीच कायाकल्प योजना मे संवेदकों द्वारा इस्तेमाल किए गये सामग्री (मेटेरियल) की पोल पट्टी उस समय खुल कर सामने आ गई। जब एकाएक मजदूरो के उक्त बिल्डिंग का निचला छत का छज्जा का मोटा प्लास्टर भरभरा कर गिर गया। सौभाग्य से उस समय वहां कोई नही था, अन्यथा बड़ा हादसा अवश्यभावी था।
जानकारी के अनुसार उक्त बिल्डिंग मे मजदूर सपरिवार रहते हैं। मिली जानकारी के अनुसार बीते 29 अक्टूबर की रात्रि लगभग साढ़े आठ बजे उक्त घटना से चन्द मिनट पुर्व ठीक उसी स्थान पर सीसीएल कर्मी रुद्र कुमार कुर्सी लगाकर बैठा था। वहां से वह जैसे हीं हटा कि उक्त घटना घट गई।
बताया जाता है कि उक्त सीसीएल कर्मी कथारा क्षेत्र के एक्सक्यूटिव हास्टल मे रसोईया का कार्य करता है। इस घटना के बाद पुरे ब्लाक में रहने वाले मजदूर और उसके परिवार दहशत जदा है। बताया जाता है कि लगभग दो वर्ष पूर्व ही इस ब्लाक मे सीसीएल द्वारा लाखो खर्च कर कायाकल्प योजना के तरह मकानों की मरम्मती का काम करवाया गया था, जो क्षेत्र के एक संवेदक द्वारा किया गया था।

घटना के बाद सवाल उठना लाजमी है कि लाखों खर्च के बाद भी अगर मजदूरो के आवास की दशा जर्जर हो तो निश्चित ही यहां के कार्यो के दौरान संवेदक और अधिकारियों की मिली भगत का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। बहरहाल मामला कुछ भी हो मगर इस घटना के बाद यहां रहने वाले मजदूरों की जान पर सामत बन गयी है। अगर समय रहते सीसीएल प्रबंधन द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो किसी अनहोनी या बड़ी घटना से इंकार नही किया जा सकता।
इस संबंध में कथारा वाशरी के परियोजना अभियंता असैनिक से पुछे जाने पर उन्होंने मामले की जांच कर जल्द ही मरम्मति की बात कही। वहीं उन्होंने कहा कि ऐसी ही स्थिति क्षेत्र के बांध कॉलोनी स्थित कई मजदूर आवासो की भी बन गयी है। इसे लेकर प्रबंधन द्वारा वैसे जर्जर आवासो को गिराने को लेकर कार्रवाई की पहल की जा रही है। उन्होंने बताया कि वैसे चिन्हित भवनो पर प्रबंधन द्वारा चेतावनी अंकित किया जा चुका है।
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