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स्कूल की थाली से गायब होती जा रही है पोस्टिक आहार

ममता सिन्हा/तेनुघाट (बोकारो)। बच्चों को आकर्षित करने, उन्हें अतिरिक्त पोषण उपलब्ध कराने एवं उनके स्वास्थ्य में सुधार लाने के उद्देश्य से शुरू की गई मध्यान्ह भोजन योजना का बच्चों को समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है।

सूत्रों की माने तो अधिकांश स्कूलों में बच्चों को गुणवत्ताहीन भोजन वितरित किया जा रहा है। जबकि बच्चों को पौष्टिक आहार देने हेतु शासन की ओर से मैन्यू भी निर्धारित किया गया है।

लेकिन मध्यान्ह भोजन बनाने एवं वितरण करने वाले लोग मैन्यू को दरकिनार कर गुणवत्ताहीन भोजन ही बच्चों को परोस रहे हैं। वहीं कुछ बच्चों की माने तो उनके थाली में भोजन सिर्फ एक बार ही दिया जाता है, दोबारा मांगने पर भोजन की जगह फटकार मिलती है।

इस संबंध में बोकारो जिला के हद में होसिर के पूर्व मुखिया घनश्याम राम ने 18 अप्रैल को एक भेंट में कहा कि बच्चों को पौष्टिक व संतुलित आहार उपलब्ध कराने के लिए सरकारी स्कूलों में चालू मिड-डे-मील (एमडीएम) योजना नियमित जांच न होने से दम तोड़ रही है।

स्कूलों में एमडीएम के तहत बच्चों को मानकों के अनुरूप पौष्टिक थाली मुहैया नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में कक्षा एक से लेकर आठवीं तक के बच्चों के लिए एमडीएम की व्यवस्था है। इसके लिए डाइट तो तय है कि रोजाना के लिए अलग-अलग मैन्यू तक की व्यवस्था है।

बच्चों को भोजन में हरी सब्जी, दालें, अंडा तक दिए जाने का प्रावधान है, लेकिन अधिकारियों की सुस्ती के कारण मैन्यू सही तरीके से फॉलो नहीं होता है। गुणवत्ता से समझौता बच्चों की सेहत पर असर डालना है।

अधिकारियों के उदाशीनता के कारण खाद्यान्न की गुणवत्ता, तय मैन्यू का पालन आदि स्थिति की जांच नहीं हो पाती है। बेहतर हो, इसकी रूटीन चेकिंग की जाए।

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