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सांस्कृतिक कार्यक्रम दुगोला चैता में झूमते रहे रात भर रहिवासी

सिद्धार्थ पांडेय/जमशेदपुर (झारखंड)। भारतीय भोजपुरी सांस्कृतिक मंच, महावीर कीर्तन मंडली किरीबुरू के तत्वावधान में दुर्गापूजा पंडाल में दुगोला चैता का आयोजन किया गया। शुभारंभ मुख्य अतिथि सीजीएम कमलेश राय, विशिष्ट अतिथि महाप्रबंधक राम सिंह, सहायक प्रबंधक अजय शंकर मिश्रा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

कार्यक्रम का शुभारम्भ प्रसिद्ध भोजपुरी संस्कृति प्रेमी स्व. लाल बचन यादव को श्रद्धांजलि व दो मिनट का मौन रखकर किया गया। इस अवसर पर अपने संबोधन में कमलेश राय ने कहा कि भारत विविधताओं में एकता का देश है।

इस देश में विभिन्न भाषा-भाषी, संस्कृति, वेश-भूषा को मानने वाले अपनी अलग-अलग संस्कृति के जरिये बेहतर दृश्य प्रस्तुत करते रहे हैं। चैत महीना अथवा चैता ऋतु परिवर्तन, प्रकृति व पर्यावरण प्रेम के रूप में जाना जाता है। पतझड़ बीत चुका होता है। वृक्षों और लता में नई-नई कोपलें आ जाती हैं।

चैत महीने में राम का जन्मोत्सव होने के कारण राम का वर्णन चैता गीतों में तो आता है, परंतु इसमें कृष्ण और राधा के विरह का भी जिक्र है। इन गीतों में शिव पार्वती के भी संवाद कर्ण प्रिय लगते हैं। यह दुगोला चैता बड़बिल की हर-हर रामायण मंडली एवं किरीबुरु की महावीर किर्तन मंडली के बीच आयोजित किया गया।

बताया जाता है कि किरीबुरु की तरफ से झारखंड के व्यास संजय पासवान एवं बड़बिल की तरफ से व्यास रानू भारती द्वारा भोजपुरी लोग गीतों के जरिये प्रभु श्रीराम, हनुमान, शंकर, पार्वती, राधा कृष्ण आदि का गुनगान किया गया। गायकों के गीतों पर महिला नर्तकी व स्थानीय रहिवासी रात भर नाचते व झूमते नजर आये।

इस दौरान कमिटी के उपाध्यक्ष बदन गिरी, सचिव अरविन्द कुमार सिंह, अजय गिरी, शुक्लाजी, शंभू हाजरा, महाकांत झा, राजकपूर गुप्ता, महाजन चौधरी, बसंत सिंह, वृजनाथ प्रसाद, रामाधार सिंह, शिव कुमार गुप्ता, जलेश्वर गिरी आदि सैकड़ो रहिवासी मौजूद थे।

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