बाल मजदूरी और शिक्षा पर नाटक का मंचन
एस. पी. सक्सेना/लातेहार (झारखंड)। शिक्षा बचाओ, देश बचाओ की ज्ञान विज्ञान समिति का काला जत्था बीते 6 अप्रैल की देर शाम लातेहार जिला के हद में चंदवा पहुंचा। यहां इंदिरा गांधी चौक के समीप जत्थे में शामिल टीम ने बाल मजदूरी और शिक्षा से संबंधित नाटक का मंचन किया।
इस अवसर पर कलाकारों ने नाटक और गीत प्रस्तुत कर नई शिक्षा नीति से बदहाल हो रही शिक्षा व्यवस्था से रहिवासियों को जागरूक किया। बच्चों को मजदूर नहीं बनाने, उसे स्कूल भेजने और शिक्षित करने पर जोर दिया गया। इस अवसर पर पर्चा का भी वितरण किया गया।
उक्त पर्चा में कहा गया है कि ज्ञान विज्ञान समिति झारखंड अपने जन्म काल से ही शिक्षा के महत्व को लेकर रहिवासियों में जागरूकता पैदा करने हेतु काला जत्था के माध्यम से जन जागरण करने हेतु समय-समय पर अभियान चलाता रहा है।
अभियान में कला के लिए ना होकर काला जीवन के लिए हो, इसकी कोशिश करते रहे हैं। इसी परिपेक्ष में ज्ञान विज्ञान समिति झारखंड अपनी सांस्कृतिक विरासत को सिमृद्ध करने के साथ साथ शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजी रोजगार के सवाल को आमजन तक ले जाने के लिए कला जत्था का सहारा लिया है।
कहा गया कि केंद्रीय सत्ता पर बैठे सत्ताधीश संविधान के मूल भावना के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। नई शिक्षा नीति के माध्यम से आम जनता को शिक्षा से दूर करते जा रहे हैं। एक-एक कर सरकारी संपत्ति को निजी हाथ में देकर देश के व्यापक जनता को बदहाली की जिंदगी बसर करने को मजबूर करते जा रहे है।
ऐसी परिस्थिति में हम सभी संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने वाले हैं, जो सबको शिक्षा, सबको काम के सिद्धांत को मानने वाले हैं। उनकी संवैधानिक जिम्मेदारी है कि आमजनों को प्रेरित कर सत्य के साथ खड़े होने को कहें और देश के राजनीतिक, सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक स्थिति का आकलन करने को कहें।
कहा गया कि आज हमारा देश वैश्विक भुखमरी सूचकांक में 121 देश में 107 वें स्थान पर है। मानव विकास सूचकांक में शिक्षा स्वास्थ्य पोषण में 191 देशों में 132 वां स्थान पर है, जो काफी भयावह स्थिति है। सरकारी स्कूलों में शिक्षक की कमी है। शिक्षकों की बहाली के बजाएं स्कूल मर्ज के बहाने स्कूल को बंद कर दिया गया है।
यही स्थिति अस्पताल का है। गांव गांव में सहिया तो है, परंतु चिकित्सक नहीं है। कुछ है भी तो वे शहर में अपनी निजी प्रैक्टिस में व्यस्त हैं। आंगनबाड़ी केंद्र, जन वितरण प्रणाली, मनरेगा जैसी योजना जो किसी न किसी प्रकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को थोड़ा बहुत मदद करता रहा है, को भी तहस-नहस कर दिया गया है।
उपरोक्त बातों के मद्देनजर ज्ञान विज्ञान समिति झारखंड द्वारा विगत दिनों शिक्षा की स्थिति पर सर्वे किया। परिणाम चौंकाने वाला रहा। इस सर्वे के आधार पर समिति द्वारा खेत खलिहान में शिक्षा के लिए पहल किया गया और सामुदायिक शिक्षण केंद्र खोलकर बच्चों को शिक्षा से पूर्व स्कूल से जोड़ने का काम किया है।
कहा गया कि हम कला जत्था के माध्यम से शिक्षा बचाओ, देश बचाओ नारे के साथ सभी मजदूर, किसान, छात्र, नौजवान बेहतर समाज का सपना देखने वाले बुद्धिजीवी गण का आह्वान करते हैं, कि शिक्षा अधिकार कानून-2009 बच्चों के समुचित शिक्षा के प्रबंधन की जिम्मेदारी सरकार और समुदाय के सहयोग से शत-शत करने की बात करते हैं।
कहा गया कि पोषण के मामले में अगर आप देखें तो खाद्य सुरक्षा कानून-2013 जिसमें पर्याप्त रूप से बच्चों एवं उनकी माताओं के खाद्य सुरक्षा की बात कही गई है। बच्चों की अगर बात करते हैं तो उनके अधिकार की शुरुआत माता की कोख से शुरू हो जाती है, परंतु वर्तमान केंद्र सरकार द्वारा जो प्रधानमंत्री मात्रृ वंदना योजना है उसके क्रियान्वयन में तकनीकी कठिनाइयां है।
हम इस जत्था के माध्यम से अपने नाटकों के माध्यम से जनता के बीच यह संदेश देना चाहते हैं। एक संवाद की शुरुआत करना चाहते हैं। अपनी स्थितियों को जानते समझते हुए सरकार से और उसकी व्यवस्था के सामने एक नागरिक होने के नाते लोकतंत्र के मालिक होने के नाते उसकी जवाबदेही क्या है। उसको याद दिलाना चाहिए, परंतु खेद जनक बात यह है कि जितने भी जनता के कल्याणकारी कानून है उन सब में सामाजिक जवाबदेही और पारदर्शिता की बात कही गई।
कहा गया कि झारखंड सरकार इस मामले में पिछले कई वर्षों से नए-नए स्वांग रच कर सामाजिक अंकेक्षण इकाई को ही मूल्य विहीन कर बैठी है। हम पुनः आह्वान करते हैं सभी नागरिकों से की इस जत्था का हिस्सा बने। आइए साथ मिलकर समर्थ लोकतंत्र की स्थापना के लिए पारदर्शी शासन व्यवस्था और सरकार को जवाबदेह बनाने के लिए वैज्ञानिक नजरिया और संवैधानिक मूल्य पर विचार करें। अभियान को निरंतर जारी रखने में हमारा सहयोग दें।
काला जत्था टीम का नेतृत्वकर्ता रवि सिंह, शांति कुमारी, रुणी कुमारी, कल्पना हेंब्रम, दयावती कुमारी, अरुण उरांव, शिवकांत पाठक, पिंटु उरांव, मंटु कुमार तुरी, जितेन्द्र कुमार तुरी, गुणाधर पंडित, शिमंती कुमारी शामिल थे। इनका सहयोग दिलीप पाठक, कामता पंचायत के पंचायत समिति सदस्य अयुब खान, जितेन्द्र सिंह, बीरेंद्र कुमार, रवि शंकर जाटव, गौतम कुमार ने की।
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