सिद्धार्थ पांडेय/जमशेदपुर (झारखंड)। पश्चिमी सिंहभूम जिला के हद में डीएवी पब्लिक स्कूल गुवा में 22 दिसंबर को गुरु गोविंद सिंह जयंती पूरे श्रद्धा, सम्मान एवं हर्षोल्लास के साथ मनाई गई।
इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य डॉ मनोज कुमार की अध्यक्षता में विद्यालय में अध्ययनरत सभी सिक्ख समुदाय के बच्चों को विशेष प्रार्थना सभा में सम्मानित किया गया एवं गुरु गोविंद सिंह की महत्ता पर सारगर्भित विचार स्कूल के प्राचार्य ने दिए।
प्राचार्य ने कहा कि गुरु गोबिन्द सिंह सिखों के दसवें गुरु थे। वे अपने पिता गुरू तेग बहादुर राय के बलिदान के उपरान्त 11 नवम्बर सन 1675 को 10 वें गुरू बने। वे एक महान योद्धा, चिन्तक, कवि, भक्त एवं आध्यात्मिक नेता थे। सन 1699 में बैसाखी के दिन उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की जो सिखों के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है।
प्राचार्य डॉ मनोज ने कहा कि गुरु गोविन्द सिंह का जन्म नौवें सिख गुरु गुरु तेग बहादुर और माता गुजरी के घर पटना जो अब बिहार की राजधानी हैं में 22 दिसम्बर 1666 को हुआ था। वे बिहार की राजधानी पटना शहर के गौरव है। जब वह पैदा हुए थे उस समय उनके पिता असम में धर्म उपदेश को गये थे। उनके बचपन का नाम गोविन्द राय था।
प्राचार्य ने यहां स्वच्छता पर आधारित स्वच्छ भारत अभियान में अहम भूमिका निभाने हेतु बच्चों को मार्गदर्शित किया। इस अवसर पर उन्होंने देश में फैल रहे कोरोना पर गहरी संवेदना व्यक्त की एवं स्वच्छता अभियान के तहत कोरोना के भारत में प्रवेश करने से रोकने हेतु प्रेरित किया। इस अवसर पर विद्यालय के मेधावी छात्र गुरदर्शन सिंह, दिलराज सिंह, मनप्रीत सिंह व अन्य सिक्ख समुदाय के बच्चों को विद्यालय का गौरव बताया।
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