ममता सिन्हा/तेनुघाट (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में तेनुघाट महाविद्यालय में 23 सितंबर को स्व.बिनोद बिहारी महतो की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य सहित महाविधालय कर्मी व् कई गणमान्य शामिल थे।
यहां उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि बिनोद बिहारी महतो झारखंड के महान क्रांतिकारी नेता थे। झारखंड अलग राज्य आंदोलन को लेकर एक लंबी लड़ाई गुरुजी शिबू सोरेन के साथ मिलकर लड़ी थी।
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) संस्थापक अध्यक्ष के रूप में उन्होंने झारखंड की राजनीति में एक अलग पहचान दिया। वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने झारखंड राज्य आंदोलन का नीति बनाकर आंदोलन को नई दिशा दी थी, जिसके कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा था।
महाविद्यालय के प्रचार्य सुदामा तिवारी ने छात्रों को बताया कि पढ़ो और लड़ो का नारा भी उन्ही की देन है। उन्होंने कहा कि बिनोद बिहारी महतो का जन्म आज हीं के दिन 23 सितंबर 1923 हुआ था। उनका निधन 18 दिसंबर 1991को हृदय गति रुक जाने के कारण हो गया था। तब वे गिरिडीह लोकसभा से सांसद थे।
उन्होंने कहा कि स्व. विनोद बिहारी पटेल एक वकील और राजनीतिज्ञ थे। वह 1972 में झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक थे। उन्होंने 1980, 1985, 1990 में बिहार विधानसभा के तीन बार सदस्य और 1991 में गिरिडीह से लोकसभा के सदस्य थे।
प्राचार्य ने बताया कि बिनोद बिहारी महतो का जन्म 23 सितंबर 1923 को धनबाद जिला के बालीपुर प्रखंड के बडवाहा गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम महेंद्र महतो और माता मंदाकिनी देवी थी। उनका जन्म कुड़मी समाज के परिवार में हुआ था।
उनके पिता किसान थे। उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा बालीपुर से की। उन्होंने अपना मिडिल और हाई स्कूल झरिया डीएवी और धनबाद हाई इंग्लिश स्कूल से पूरा किया। उन्होंने फुलमनी देवी से शादी की। उनके पांच बेटे राज किशोर महतो, नील कमल महतो, चंद्र शेखर महतो, प्रदीप सुमेर महतो, अशोक कुमार महतो और दो बेटियां चंद्रवती देवी व् तारावती देवी थी।
उन्होंने बताया कि उनका बड़ा पुत्र राजकिशोर महतो एक बार गिरिडीह से सांसद भी रह चुके है। इस मौके प्रो. धनन्जय रविदास, प्रेम सागर, दिनेश्वर स्वर्णकार, महावीर यादव, कालीचरण महतो, रावण मांझी सहित महाविधालय के सभी कर्मचारीगण मौजूद थे।
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