श्रीपाद सोसायटी के विकास का रास्ता हुआ साफ
प्रहरी संवाददाता/मुंबई। मुलुंड पश्चिम के श्रीपाद कॉपरेटिव हाउसिंग सोसायटी (Shripad Cooperative Housing Sosayati) के विकास में रोड बने करीब आधा दर्जन शिकायतकर्ताओं को मुंबई हाई कोर्ट (Mumbai High Court) ने जोर का झटका धीरे से दिया है। जिसके कारण बेवजह शिकायत करने वाले चारो खाने चीत हो गए हैं।
मुंबई हाईकोर्ट के आदेश पर उवत झोपड़पट्टी पर घंटों बुल्डोजर का तांडव चला और झोपड़ों को ध्वस्त कर दिया। जिससे गरीबों के सपनों का आशियाना मिलने और विकास का रास्ता साफ हो गया। इस लड़ाई में फर्जी मुद्दों पर शिकायत करने वालों को हर मोड़ एडवोकेट सत्यम दुबे ने शिकश्त दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मुलुंड पश्चिम परिसर स्थित एमसीसी कॉलेज (MCC College) के पास श्रीपाद कॉपरेटिव हाउसिंग सोसायटी है। इस सोसायटी के विकास की जिम्मेदारी मेट्रो इंफ्रास्ट्रक्चर नामक बिल्डर को दी गई है। ताकी चालों की जगह को विकासीत कर यहां के रहिवासियों के सपनों का आशियाना मुहैया कराए।
करीब पांच साल पहले उपरोक्त सोसायटी के सदस्यों के साथ मेट्रो इंफ्रास्ट्रक्चर से जरूरीयात कवायद पुरी कर ली गई। इस बीच स्थानीय शिकायतकरर्ताओं का दल सक्रिय हो गया।
चूंकि एसआरए परियोजना के तहत शायद उन्हें कुछ और उम्मीदें थी। एडवोकेट सत्यम दुबे के अनुसार शिकायतकरर्ताओं में गोटीराम पाटील, विकास कसार, वसंत ममाड, रोहन ममाड और लक्ष्मी बाई ठूंबे आदि का समावेश है।
शिकायतकर्ताओं के मनसूबों पर फिरा पानी
स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (एसआरए) के तहत इस परियोजना को विकसित करने के लिए मेट्रो इंफ्रास्ट्रक्चर नामक बिल्डर ने हामी भरी और करीब पांच, छह साल पहले इसका शुभारंभ किया गया था।
लेकिन शिकायतकर्ताओं की वजह से कई बाधाएं आई। शिकायतकर्ताओं ने संबंधित विभागों में अनगिनत शिकायत की थी। ऐसे में हर जगह नाकाम होने के बाद शिकायतकर्ता खुद मुंबई हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
जहां सुनवाई के दौरान एडवोकट सत्यम दुबे ने लगभग सभी बिंदुओं पर प्रकाश डाला वहीं शिकायतकर्ताओं की दलीलें झुठ और फरेब साबित हुई। इसके बाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में सुनाया कि विकास कार्यो में बाधा नहीं डाला जा सकता।
क्योंकि मुट्ठी भर लोगों की मन गढ़ंत शिकायतों के कारण बड़ी संखया में रहिवासियों को मायुस नहीं किया जा सकता आदि। इसके बाद अदालत के आदेश पर एसआरए (SRA) परियोजना के तहत मुलुंड पश्चिम के कोर्ट परिसर स्थित श्रीपाद कॉपरेटिव हाउसिंग सोसायटी में बुलडोजर चला कर विकास का रास्ता साफ कर दिया गया।
उल्लेखनीय है कि ऐसे कई मामले मुंबई सहित उपनगरीय क्षेत्रों में लंबीत हैं। इस सोसायटी के चंद लोगों को छोड़ कर बाकी सभी रहिवासियों ने मुंबई हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है।
अब यह देखना काफी दिलचस्प होगा की शिकायतकर्ता अब किसके पास जाते हैं। अब श्रीपाद कॉपरेटिव हाउसिंग सोसायटी के सदस्यों की उम्मीदे मेट्रो इंफ्रास्ट्रक्चर नामक बिल्डर के विकास पर टिका है।
568 total views, 2 views today