दलित विधायक होने के कारण स्पीकर ने ऐसा बर्ताव किया यह कहीं से भी उचित नहीं है-विधायक
एस.पी.सक्सेना/रांची (झारखंड)। विधानसभा झारखंड के मानसून सत्र के अंतिम दिन 9 सितंबर को भोजनवकाश के बाद अजीबोगरीब स्थिति देखने को मिली। बोकारो जिला (Bokaro district) के हद में चंदनकीयारी के भाजपा विधायक अमर कुमार बाउरी सदन से रोते हुए बाहर निकले।
विधायक ने सदन के भीतर हुई घटना के बारे में मीडिया को बताया। विधायक बाउरी ने विधानसभा स्पीकर रविंद्र नाथ महतो पर आरोप लगाते हुए कहा कि एक दलित विधायक के साथ स्पीकर का ऐसा बर्ताव कहीं से भी उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि दलित विधायक होने के कारण विधानसभा में मेरी उपेक्षा की गई। उन्होंने बताया कि सदन में कार्य स्थगन प्रस्ताव ठुकराए जाने के कारण वे काफी मर्माहत हैं । विधायक बाउरी ने कहा कि मैं भी मंत्री और विधायक रहा हूं।
मेरी भी मर्यादा है। मगर जिस तरह से विधानसभाध्यक्ष ने मेरे साथ सलूक किया है, उससे मैं बहुत ही आहत हुआ हूं। स्पीकर पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि कानून की अवहेलना और आज का काला अध्याय है।
जानकारी के अनुसार झारखंड विधानसभा के अंतिम दिन मानसून सत्र के दूसरे पहर में सदन में विधायकों द्वारा लाये गये गैर सरकारी संकल्प पर चर्चा शुरू हो रहा था। जिसपर कुल 32 गैर सरकारी संकल्प पर सदन पर चर्चा होनी है। सभी संकल्प विभिन्न विभागों से जुड़ी हुई है।
संबंधित विभागीय मंत्री द्वारा विधायकों के द्वारा लाये गैर सरकारी संकल्प पर सदन में सरकार का जवाब दे रहे थे। इससे पहले सदन से बाहर निकल कर आये भाजपा विधायक अमर कुमार बाउरी मीडिया से बात करते हुए रो पड़े।
उन्होंने कहा कि मैंने पहली कार्य स्थगन का प्रस्ताव लाया था, लेकिन स्पीकर ने उसे नहीं माना। उन्होंने कहा कि उन्हें दलित होने की सजा दी गयी है। स्पीकर पंच के समान होते हैं। उन्हें ऐसी अनदेखी नहीं करनी चाहिए थी। कम से कम स्पीकर को उनका कार्य स्थगन प्रस्ताव को पढ़ लेना चाहिए था।
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