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कोरोना के कहर से बिलखते गरीब

कोविड के मरीजों का मुफ्त इलाज कराय सरकार -शेवाले मुश्ताक खान/मुंबई। कोरोना की दुसरी लहर ने महाराष्ट्र सहित पुरे देश की जनता को हिला कर रख दिया है। मौजूदा हालात को देखते हुए संक्रमित हो रहे मध्यमवर्गीय मरिजों का इलाज महात्माफुले जन आरोग्य योजना और आयुष्यमान भारत जन आरोग्य योजना के तहत राज्य एवं केंद्र सरकार (Central government) को कराना चाहिए। ऐसी मांग सांसद राहुल शेवाले (Rahul Shevale) ने मुख्यमंत्री से की है। इस सबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र भी लिखा है।
मिली जानकारी के अनुसार सांसद राहुल शेवाले ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखे पत्र में कहा है कि मैाजूदा समय में आर्थिक संकटों से जुझते मध्यमवर्गीय कोरोना के मरिजों की आर्थिक स्थिति बद से बत्तर हो गई है। इनमें अधिकांश लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है, वे किसी तरह अपनी जीविका चला रहे हैं। पत्र में उन्हों ने लिखा है कि राज्य में रोज कमाने खाने वालों के सामने चुनौतीयां और भुखमरी की नौबत आ गई है। ऐसे में केंद्र एवं राज्य सरकार संयुवत रूप से महात्मा फुले जन आरोग्य योजना और आयुष्यमान भारत जन आरोग्य योजना के तहत लोगों को सहयोग करे। ताकि लोग धीरे धीरे खुद को संभाल सकें। शेवाले ने सरकारों का ध्यान अपने पत्र की ओर कराते हुए यह भी लिखा है कि कोरोना की पहली लहर ने खास तौर पर झुग्गी और घनी आबादी वाले इलाको में कहर बरपाया था। लेकीन दुसरी लहर ने मध्यमवर्गीय सोसायटीयों को भी अपने चपेत में ले लिया है। जिसके कारण मामूली लक्षण से भी लोग घबराने लगे हैं। इन्हीं कारणों से सरकारी अस्पताल और कोविड सेंटरों में कोरोना के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा होता जा रहा है। ऐसे हालात में मध्यमवर्गीय जनता नजदीकी निजी अस्पताल और नर्सिंग होम का रूख कर रही है। एक अनुमान के अनुसार कोरोना से पिड़ित कोई भी मरीज किसी निजी अस्पताल या नरसिंग होम में भर्ती होता है तो करीब एक हफ्ते में उसका बील सवा लाख से डेढ़ लाख या इससे भी अधिक होता है। ऐसे में बेरोजगारी और भुखमरी का सामने कर रहे किसी परिवार के एक से अधिक लोग संक्रमित होते हैं, तो लगभग 18 से 20 लाख रूपये का बील बनेगा। इतनी बड़ी रकम लोग कहां से लाएंगे?

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