24 दिनो के भीतर दस मौतो से पुरा गांव दहशत के साये में जिने को मजबूर
प्रहरी संवाददाता/बोकारो। एक तरफ पुरी दुनिया और खास कर भारत वर्ष कोरोना महामारी के भयंकर जद में है। देश का हर व्यक्ति दहशत के साये में जिने को मजबूर है। सरकार (Government) अपनी ओर से इस संक्रमण को रोकने का हर संभव प्रयास कर रही है मगर लगातार बढ़ते मौत के आकड़ो के कारण और हर दिन संक्रमितो की संख्या में इजाफा सरकार को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है।
हालाकि सरकार लाॅकडाउन लगाकर संक्रमण के चेन को तोड़ने की जुगत में लगी है। युद्ध स्तर पर वेक्सिनेशन का भी अभियान चल रहा है। मगर संक्रमण के चेन को फिलवख्त रोका भी नही जा सका है। ऐसे में राज्य के हर जिले हाई अलर्ट दौर से गुजर रहा है। ऐसे में स्थानीय पुलिस, प्रशासन की जवाबदेही भी दोगनी हो गई है। ऐसे समय में अगर किसी पंचायत से यह सूचना मिले की फलां गांव में महामारी ने अपना पैर पसार दिया है। मात्र 24 दिनों के भीतर वहा दस लोगों की मौते हो गई और दर्जनों की संख्या में ग्रामीण उक्त वायरस से संक्रमित है तो चौकना लाजमी है।
इसी तरह की एक सूचना 28 अप्रैल को बोकारो जिला (Bokaro District) के हद में गोमियां प्रखंड के झिरकी पंचायत के मुस्लिम टोला से मिली। जानकारी के अनुसार पिछले 24 दिनो के अंदर अब तक यहां दस मौते हो चुकी है। जिस कारण पुरा गांववासी दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं। पुरे गांव में दहशत के साथ साथ हर तरफ मातम पसरा है। गांव वालों के अनुसार अब तो कब्रिस्तान में कब्र बनाने को भी लोग नहीं मिल रहा है। मिली जानकारी के अनुसार मृतकों में अब्दुल गफ्फार (48), मो. इलियास (49), ताहिर हुसैन(50), सरताज की मां(55), शफिक अंसारी (65), मुख्तार अंसारी (68), हक बाबु की मां(62), शफिक की बहु (35), 30 वर्षीय संजर अंसारी सहित 52 वर्षीय सिराजुद्दीन अंसारी का नाम शामिल हैं। इस संबंध में उक्त पंचायत की मुखिया शाबाना रोजी को उनके मोबाइल नंबर 9110943832 पर फोन कर जानकारी चाही तो उनके पति सह पुर्व मुखिया हाजी मिकाईल अंसारी ने उपरोक्त घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि बाते सही है। गांव में दहशत व्यप्त है। लोग लगातार हो रही मौतो से खौफजदा हैं। यह पुछ जान पर कि इस तरह की घटना की जानकारी आपने प्रखंड या जिला प्रशासन को दी कि नही तो उन्होने इंकार करते हुए कहा कि आज और अभी बीडीओ साहब को फोन करने वाला हूं।
बताता चलू कि यह गांव सीसीएल कथारा प्रक्षेत्र का पोषक क्षेत्र में है मगर आज तक इस गांव में ना तो प्रशासन की ओर से और ना ही सीसीएल प्रबंधन की ओर से सेनेटाइजिंग किया गया है। दिगर बात है कि दस लोगों की मौते कैसे हुई और गांव में कौन सा संक्रमण फैला है यह तो जांच का विषय है। मगर पुरे गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है और अगर समय रहते इस मामले को गंभीरता से नही लिया गया तो लोगो को गांव छोड़ कर भाग कर जान बचाने की नौबत आन पड़ेगी। इस पुरे मामले में पंचायत प्रतिनिधियों की लापरवाही साफ झलकती है। दुसरी ओर लोग कोरोना महामारी फैलने के भ्रम के शिकार बने दिखते हैं। जिससे इस गांव में झोला छाप डॉक्टरों ने भी आना बंद कर दिया है। कुछ लोगों का कहना है कि अगर इस घटना की भनक प्रशासन को हुई तो गांव से सख्ती बढ़ जायेगी। मगर सवाल उठता है कि लोग की जान बचाना जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकता होनी चाहिए ना कि प्रशासन की सख्ती से खौफ खाने की। कुल मिलाकर इस पुरे पंचायत के लोगो के चेहरे ही डर, भय और दहशत साफ देखी जा सकती है।
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