विजय कुमार साव/गोमियां(बोकारो)। गोमियां प्रखंड (Gomian block) के हद में घोर नक्सल प्रभावित झुमरा पहाड़ का अमन गांव को ख्याली महतो (Khayali Mahato) ने बसाया था। आज भी यहां सड़क नहीं है।
पेयजल की समुचित सुविधा नहीं है। और तो और यहां स्वास्थ्य सुविधा मयस्सर नहीं है। आज भी झुमरा पहाड़ की चोटी पर अपना आशियाना बनाकर रहनेवाले रहिवासी मूलभूल सुविधाओं से कोसो दूर हैं।

जानकारी के अनुसार झुमरा पहाड की चोटी पर बसा अमन गांव ख्याली महतो अपने पुत्र फातें महतो के साथ बसाया था। फाते महतो के 4 पुत्र थे। उन्हीं के वंशज ज्ञानचंद महतो ने बताया कि आज से चार पीढ़ी पहले उनके पूर्वज इस गांव में फुसरो के जरीडिह से आकर यहां पर बस गये थे। अमन गांव उनके पूर्वजों द्वारा बसाया हुआ गांव है। इस गांव में 15 से 20 घर है। इनमें सारे ग्रामीण उनके पूर्वजों के वंशज हैं। इस गांव की आबादी ढाई सौ से तीन सौ है।
ज्ञानचंद महतो ने बताया कि आज भी यहां के ग्रामवासी चुआ एवं दाडी की पानी पीते हैं। इस गांव में एक भी बोरिंग नहीं है और ना ही कुआं है। एक तालाब है जिसमें लोग अपने दिनचर्या का कार्य करते हैं। रहिवासीयो के अनुसार इस गांव में सड़क तक नहीं है। सरकारी राशन उठाने के लिए चुटे गांव करीब 35 किलोमीटर दूर है। सरकारी राशन लाने के लिए घोड़े का उपयोग करते हैं। एक स्थान से दूसरे स्थान आने जाने के लिए घोड़े ही साधन है। यहां के रहिवासियों के कथनानुसार पगडंडी के रास्ते मात्र 5 किलोमीटर की दूरी चुटे पड़ता है। अभी तक वहां जाने के लिए सड़क नहीं बन सका है। बरसात के दिनों में तो इनका जीना और भी दूभर हो जाता है। अमन वासी बाहरी दुनियां से पूरी तरह से कट जाते हैं। नदी नालों में पानी भरा रहता है। इस दौरान अगर किसी की तबीयत खराब हो जाए तो इलाज कराना बहुत ही मुश्किल होता है। सरकारी उदासीनता के कारण पुल का निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया है। आज भी यहां के रहिवासी विकास से कोसों दूर है। बेरोजगारी का आलम यह है की दूसरे परदेस में जाकर आजीविका कमाते हैं।
अमन गांव की महिलाओं ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि कुछ के पास यहां राशन कार्ड है, बाकी के पास नहीं है। सरकार द्वारा मिलने वाली वृद्ध एवं विधवा पेंशन यहां के बुजुर्गों को नहीं मिलता। सरकार विकास के बड़ी-बड़ी दावे करती है, लेकिन विकास के नाम पर यहां कुछ नहीं हुआ।
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