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आयुर्वेद दिवस पर स्वस्थ जीवनशैली एवं निवारक स्वास्थ्य देखभाल अपनाने का संदेश

एस. पी. सक्सेना/बोकारो। जिला आयुष समिति बोकारो द्वारा 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर 23 सितंबर को शिबू सोरेन स्मृति भवन (टाउन हॉल) सभागार में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि तथा अतिथियों द्वारा आयुर्वेद के जन्मदाता भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।

मौके पर बोकारो के उप विकास आयुक्त (डीडीसी) शताब्दी मजूमदार, प्रशिक्षु आईएएस अरविंद राधाकृष्णन, सिविल सर्जन डॉ ए.बी. प्रसाद, उप निदेशक पीआरडी बोकारो रवि कुमार, जिला आयुष चिकित्सा पदाधिकारी डॉ शिव शंकर पांडेय, सहायक जनसंपर्क पदाधिकारी (एपीआरओ) अविनाश कुमार सिंह समेत आयुष विभाग के चिकित्सक, पैरामेडिक्स एवं अन्य उपस्थित थे।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि उप विकास आयुक्त (डीडीसी) शताब्दी मजूमदार ने इस अवसर पर कहा कि बीमारी के उपचार के साथ-साथ बीमारी से बचाव पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है। कहा कि इस वर्ष के आयुर्वेद दिवस की थीम आयुर्वेद फॉर अ हेल्दियर टुमौरो है, जो आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ जीवन देने की दिशा में निवारक स्वास्थ्य देखभाल और स्वस्थ जीवन शैली के महत्व को रेखांकित करती है। उन्होंने कहा कि संतुलित आहार, नियमित योग, व्यायाम, पैदल चलना, पर्याप्त नींद और अनुशासित दिनचर्या को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। तनावपूर्ण दिनचर्या के बीच स्वयं के स्वास्थ्य के लिए समय निकालना भी आवश्यक है।

डीडीसी ने कहा कि आयुष एवं आधुनिक चिकित्सा पद्धति एक-दूसरे की पूरक हैं। आधुनिक चिकित्सा उपचार के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रही है, वहीं आयुष एवं आयुर्वेद के माध्यम से निवारक स्वास्थ्य देखभाल और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा दिया जा सकता है। दोनों क्षेत्रों में समन्वय और शोध को बढ़ावा देकर स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियां केवल कहने मात्र से आयुर्वेद एवं आयुष को नहीं अपनाएंगी। उन्हें शोध, आंकड़ों और वैज्ञानिक प्रमाणों के माध्यम से आयुर्वेद की उपयोगिता समझानी होगी। इसके लिए आयुर्वेद के क्षेत्र में अधिक से अधिक शोध, उपचार संबंधी आंकड़ों का दस्तावेजीकरण एवं प्रमाण आधारित कार्य को बढ़ावा देना आवश्यक है।

प्रशिक्षु आईएएस अरविंद राधाकृष्णन ने कहा कि आयुष और एलोपैथी का उद्देश्य एक ही है। रोगी को बेहतर उपचार उपलब्ध कराना और स्वस्थ जीवन सुनिश्चित करना। उन्होंने आयुष चिकित्सा पद्धतियों में वैज्ञानिक शोध एवं प्रमाण आधारित चिकित्सा को बढ़ावा देने पर जोर दिया। कहा कि किसी भी औषधि अथवा उपचार पद्धति की प्रभावशीलता वैज्ञानिक शोध से प्रमाणित होने पर उसकी स्वीकार्यता बढ़ती है। इससे भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को राष्ट्रीय स्तर के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर भी पहचान दिलाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने निवारक स्वास्थ्य देखभाल को भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि बीमारी होने के बाद उपचार करने के साथ-साथ स्वस्थ जीवनशैली, योग, आयुर्वेद एवं अन्य निवारक उपायों के माध्यम से रोगों की रोकथाम पर भी ध्यान देना आवश्यक है। कहा कि योग की तरह आयुर्वेद एवं अन्य भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को भी वैज्ञानिक शोध और प्रमाण के आधार पर वैश्विक स्तर पर पहुंचाया जा सकता है। इसके लिए आयुष एवं आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के बीच समन्वय तथा शोध को बढ़ावा देना आवश्यक है।

सिविल सर्जन डॉ ए.बी. प्रसाद ने कहा कि आयुर्वेद हमारी समृद्ध चिकित्सा परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में योग, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम एवं आयुर्वेदिक जीवनशैली को अपनाकर स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है। उन्होंने आमजनों से आयुर्वेद के प्रति जागरूक होने तथा स्वास्थ्य संरक्षण एवं रोगों की रोकथाम को प्राथमिकता देने की अपील की। उप निदेशक पीआरडी रवि कुमार ने कहा कि आयुर्वेद हमें रोग के उपचार के साथ-साथ रोगों से बचाव और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश देता है। कहा कि नियमित दिनचर्या, संतुलित खान-पान, योग एवं मानसिक संतुलन स्वस्थ जीवन के लिए आवश्यक हैं।

उन्होंने कहा कि तनावपूर्ण जीवनशैली के बीच स्वास्थ्य के प्रति सजग रहते हुए आयुर्वेद के सिद्धांतों को दैनिक जीवन में अपनाना चाहिए। जिला आयुष चिकित्सा पदाधिकारी डॉ शिव शंकर पांडेय ने कहा कि आयुर्वेद का उद्देश्य केवल रोगों का उपचार करना नहीं, बल्कि स्वस्थ इंसान के स्वास्थ्य की रक्षा तथा रोगी के विकारों का शमन करना है। कहा कि उचित आहार-विहार, नियमित दिनचर्या, योग, व्यायाम एवं प्रकृति के साथ तालमेल बनाकर स्वस्थ और संतुलित जीवन जिया जा सकता है। उन्होंने आयुर्वेद को संपूर्ण एवं स्वस्थ जीवन जीने का विज्ञान बताया।

कार्यक्रम के दौरान योग प्रशिक्षक पूनम तिवारी द्वारा विभिन्न योगाभ्यास कराए गए। इस दौरान सूर्य नमस्कार समेत विभिन्न योग आयामों एवं ध्यान का अभ्यास कराया गया तथा नियमित योग को दैनिक जीवन में शामिल करने के लिए प्रेरित किया गया।

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