मन और इंद्रियों को वश में कर समता की साधना ही सामयिक-उपासिका शांति
रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। श्रीजैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा चास-बोकारो की ओर से चास के पुराना कुलदीप टॉकीज कॉम्प्लेक्स स्थित माणकचंद छल्लाणी निवास स्थान में मनाए जा रहे पर्युषण पर्व के तीसरे दिन 10 सितंबर को आचार्यश्री महाश्रमणजी के आध्यात्मिक निर्देशन में सामयिक दिवस मनाया गया।
जैन धर्मावलंबियों के अनुसार इस दिन का उद्देश्य आंतरिक शुद्धि और आत्म-साधना पर जोर देना होता है। पर्युषण पर्व के दौरान जैन समुदाय विशेष रूप से आध्यात्मिक क्रियाओं में संलग्न रहता है। सामयिक दिवस इसी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इस दौरान आचार्यश्री महाश्रमणजी की सुशिष्या उपासिका शांति गुजरानी एवं सहयोगिनी निहारिका सिंघी की उपस्थिति में सामयिक के इस विशेष दिन पर जैन श्वेतांबर तेरापंथ समाज के दर्जनों अनुयायियों ने सामूहिक रूप से सामयिक की साधना की। अभिनव सामयिक में ध्यान एवं जप के प्रयोग करवाए गए। इस अवसर पर धर्मसभा में उपस्थित श्रावकों को संबोधित करते हुए उपासिका शांति गुजरानी ने सामयिक की महत्ता रेखांकित की। कहा कि मन एवं इंद्रियों को वश में कर समता की साधना करना सामयिक है।
कहा कि सामयिक का शाब्दिक अर्थ है समता में रहना, जो जैन धर्म में एक महत्वपूर्ण धार्मिक क्रिया है। यह एक ऐसी साधना है जिसमें इंसान कुछ समय के लिए सांसारिक गतिविधियों से खुद को अलग कर लेता है। इस दौरान वे ध्यान, प्रार्थना और धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करते हैं, जिससे मन को शांति मिलती है और आत्म-साधना मजबूत होती है।
उन्होंने कहा कि समता को जीवन में उतारना ही सामयिक है।
सामायिक समता की शिखर साधना है। परिस्थिति चाहे कैसी भी हो, कोई भी बात मन के प्रतिकूल है। ऐसे में सामायिक की सिद्धि को सरोकार मिल जाता है। विषमता को मिटाकर समता रूपी लक्ष्य के साथ साधना करने वाले का जीवन सफल, सार्थक, अनुकरणीय व प्रेरणा स्रोत बन जाता है। कहा कि जिस तरह अगरबत्ती स्वयं जलकर पूरे वातावरण को सुरभित कर देती है, इसी प्रकार सच्ची साधना, आराधना परिवार, समाज व राष्ट्र रूपी भूमंडल को शांति-सहिष्णुता और समभाव की भावना से ओतप्रोत कर सकती है।
मौके पर प्रकाश कोठारी, संजय बांठिया, अभय, बजरंग लाल, प्रमोद चौरड़िया, दिव्य बैद, रेणु चौरड़िया, सुनीता कोठारी, निकिता चोपड़ा, ललिता चोपड़ा आदि मौजूद रहे। उक्त जानकारी श्रीजैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा चास-बोकारो के मीडिया प्रमुख सुरेश बोथरा ने दी। उन्होंने कहा कि पर्युषण पर्व के चौथे दिन 11 सितंबर को वाणी संयम दिवस मनाया जाएगा।
![]()













Leave a Reply