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संविधान के सामने मनुवादी मानसिकता की कोई जगह नहीं-विजय शंकर नायक

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। मनुस्मृति का बचाव कर भाजपा महिला-विरोधी सोच को क्यों ढकना चाहती है? संविधान के सामने मनुवादी मानसिकता की कोई जगह नहीं है।

झारखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने मनुस्मृति को लेकर 25 अगस्त को भाजपा नेताओं की कथित पैरवी पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि भाजपा को साफ करना चाहिए कि वह डॉ भीमराव आंबेडकर के संविधान के साथ खड़ी है या मनुस्मृति की असमानतावादी सामाजिक सोच के साथ। उन्होंने कहा कि महिलाओं की स्वतंत्रता और समानता पर सवाल उठाने के बजाय दूसरे धर्मों में भी कुरीतियां हैं कहना मुद्दे से भागने की कोशिश है।

कहा कि सामाजिक बुराई चाहे किसी भी परंपरा में हो, उसका विरोध होना चाहिए। कहा कि राजा राममोहन राय ने सती प्रथा के खिलाफ संघर्ष किया तो क्या उन्हें दूसरे धर्मों की कुरीतियों की सूची गिनाने को कहा गया था? अन्याय का विरोध करने के लिए पहले किसी और के अन्याय का हिसाब देना जरूरी नहीं है।

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने कहा कि मनुस्मृति के विभिन्न श्लोकों की व्याख्या को लेकर विद्वानों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन ऐसी किसी भी सामाजिक अवधारणा को आधुनिक भारत के संवैधानिक मूल्यों से ऊपर नहीं रखा जा सकता, जो महिलाओं की स्वतंत्रता, समानता या गरिमा को सीमित करती हो। उन्होंने कहा कि यहीं कांग्रेसी नेता राहुल गांधी की राजनीतिक सोच और भाजपा की कथित मनुवादी सोच के बीच स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।

नायक ने कहा कि राहुल गांधी लगातार संविधान की रक्षा, सामाजिक न्याय, जातिगत जनगणना, समान अवसर, महिलाओं की भागीदारी और सत्ता-संसाधनों में वंचित वर्गों की हिस्सेदारी की बात करते हैं। कहा कि उनकी राजनीति का मूल संदेश है कि भारत में अधिकार जन्म से नहीं, संविधान से मिलते हैं और हर नागरिक बराबर है।

कांग्रेस प्रवक्ता नायक ने कहा कि राहुल गांधी संविधान बचाने की बात करते हैं, भाजपा के नेता मनुस्मृति के बचाव में खड़े दिखाई देते हैं। देश की जनता को तय करना है कि भारत को 21वीं सदी का संवैधानिक लोकतंत्र चाहिए या सदियों पुरानी असमान सामाजिक व्यवस्था? उन्होंने भाजपा से सीधा सवाल किया। कहा कि क्या महिलाओं को स्वतंत्र नागरिक मानना भाजपा को स्वीकार है? क्या जाति और जन्म के आधार पर असमानता स्वीकार है? क्या भाजपा डॉ आंबेडकर के संविधान को सर्वोच्च मानती है?

नायक ने कहा कि महिला सम्मान केवल नारे लगाने से नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, राजनीतिक प्रतिनिधित्व, आर्थिक स्वतंत्रता और बराबरी के अधिकार से सुनिश्चित होता है। राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी इसी संवैधानिक बराबरी की राजनीति को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा चाहे जितना मुद्दा भटकाए, कांग्रेस संविधान, सामाजिक न्याय और महिला समानता के सवाल पर पीछे नहीं हटेगी। मनुवादी सोच को लोकतंत्र और संविधान से ऊपर रखने की किसी भी कोशिश का पुरजोर राजनीतिक विरोध किया जाएगा।

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