रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। बोकारो जिले के पीजीटी और टीजीटी शिक्षक जब छात्र जीवन में शिक्षक बनने का सपना लेकर कठिन परिश्रम कर रहे थे, तब उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि प्रतिष्ठित सरकारी विद्यालयों के शिक्षक बनने के बाद भी उन्हें नारकीय जीवन जीना पड़ेगा। वेतन नहीं मिलने के कारण आज उन्हें नारकीय जीवन जीना पड़ रहा है।
बताया जाता है कि शिक्षकों द्वारा महीने भर के आरजू-मिन्नत के बाद जब पिछले माह उन्हें मार्च महीने का वेतन मिला था, तब एक आस जगी थी कि अब वेतन भुगतान नियमित हो जाएगा, लेकिन फिर वही ढाक के तीन पात। पूरे ग्रीष्मावकाश में जनगणना कार्य में अपना अवकाश गंवाने वाले तमाम सरकारी शिक्षक अब जिला शिक्षा पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त एवं उपायुक्त बोकारो कार्यालय का चक्कर लगा-लगा कर अपना सबकुछ खो चुके हैं।
बैंकों से ईएमआई नहीं चुकाने की वजह से धमकी भरे फोन काल रिसीव करते – करते अब इन शिक्षकों के लिए शिक्षा सेवा यातना का दूसरा नाम बन चुका है। बीमार परिवार जन अब अपनी उम्मीद खो रहे हैं। निकट भविष्य में इनके साथ कोई भी अनहोनी घटना घट सकती है। अप्रैल एवं मई माह के बकाए वेतन भुगतान के आस में अब सड़कों पर दर-दर भटकने की नौबत है।
इन्हीं मांगों को लेकर संयुक्त समन्वय समिति के तत्वावधान में सैकड़ों की संख्या में पीजीटी – टीजीटी शिक्षक 12 जून को बोकारो जिला मुख्यालय समाहरणालय पर पहुंचे। सभी उच्चाधिकारियों के किसी आवश्यक बैठक में होने की वजह से बाहर होने के कारण संबंधित कार्यालयों में पत्र रिसीव कराकर अपना-अपना दर्द साझा करते हुए सभी शिक्षक आगे की रणनीति बनाने को बाध्य हैं। भुखमरी की आशंका से पीड़ित जिले के उच्च विद्यालयों के शिक्षक अब मजबूर होकर विभागीय सचिव के समक्ष अपना दर्द साझा करने की योजना बना रहे हैं।
ज्ञात हो कि जिस विभाग में भ्रष्टाचार सामने आया, उस विभाग का वेतन हो रहा है। लेकिन देश के भविष्य निर्माता शिक्षकों के जीवन से घिनौना खिलवाड़ चल रहा है, जिसकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है। मौके पर झारखंड +2 शिक्षक संघ बोकारो के अध्यक्ष पंकज कुमार सिंह, सचिव डॉ अवनीश कुमार झा, झारखंड राज्य माध्यमिक शिक्षक संघ बोकारो के अध्यक्ष बासुदेव सिंह चौधरी, सचिव मुफीद आलम, डॉ अजय कुमार पाठक, बिनोद कुमार महतो, डॉ शशिकांत पांडेय, डॉ अशरफ हुसैन, भरत कुमार महतो समेत सैकड़ों की संख्या में शिक्षक – शिक्षिका उपस्थित थे।
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