गांगजोरी में सप्तदिवसीय हनुमंत महायज्ञ में श्रीराम कथा की बही रसधार
प्रहरी संवाददाता/पेटरवार (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में जरीडीह प्रखंड के गांगजोरी ग्राम स्थित श्रीहनुमान मंदिर प्रांगण में बीते 13 मार्च से श्रीश्री 108 सप्तदिवसीय हनुमंत महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है।
आयोजित हनुमंत महायज्ञ के तृतीय दिवस बीते 16 मार्च को श्रीराम कथा में भगवान राम के अवतार का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। श्रीराम चरित मानस में गोस्वामी तुलसीदास ने रामजन्म के पूर्व भगवान शिव और मां पार्वती के विवाह की कथा का वर्णन किया है। जिसका अर्थ है कि मां पार्वती श्रद्धा स्वरुपा हैं तथा भोलेनाथ विश्वास स्वरूप हैं। अर्थात श्रद्धा और विश्वास के मांगलिक मिलन से ही श्रीराम का प्राकट्य संभव है।
श्रीधाम अयोध्या से पधारी कथा वाचिक देवी अनुराधा सरस्वती ने अपने व्याख्यान में उक्त तथ्य को अपने भाव में प्रस्तुत की। कहा कि जिस इंसान को श्रीराम और श्रीकृष्ण की उपासना करनी है, उसे सबसे पहले शिव की उपासना करनी चाहिए। भगवान शिव, रामकथा के प्रथम सोपान हैं, जिनकी कृपा के बगैर भक्ति और भगवान की प्राप्ति संभव नहीं है।
कथावाचिका देवी अनुराधा सरस्वती ने कहा कि एक बार मां पार्वती द्वारा प्रश्न पूछे जाने पर उत्तर देते हुए भगवान शिव कहते हैं कि देवी जब-जब धरती पर धर्म की हानि होती है, अति अत्याचार, व्यभिचार होते हैं, जिसे शब्दों में वर्णित न किया जा सके। जब साधु, गौ, ब्राम्हणों में त्राहि-त्राहि मचा दे, तब विवश होकर प्रभु को अलग-अलग रुपों में धरती पर अवतार लेना पड़ता है।
अवतरित होकर प्रभु दुष्टों का संहार तथा अपने भक्तों का उद्धार करते हैं। रावण और कुंभकर्ण जैसे राक्षसों के संहार एवं भक्तों के उद्धार हेतु भगवान श्रीराम अयोध्या की पावन धरा पर पधारे और सम्पूर्ण सृष्टि को आनंदित कर दिया। कथा श्रवण के लिए गांगजोरी सहित समीपस्त दर्जनों ग्रामीण क्षेत्रों तथा जैनामोड, बांधडीह, बाराडीहा आदि सुदूर इलाके के श्रद्धालु भी पहुंच रहे हैं।
बता दें कि यज्ञ-अनुष्ठान धनबाद के यज्ञाचार्य बिनोद कुमार शास्त्री, पूजन कार्य में मधुकरपुर के सुबोधकांत त्रिपाठी, मुख्य यजमान बतौर चार परिवार सपत्नीक शामिल शामिल हो रहे हैं। इसमें धीरेन्द्र महतो, पत्नी सीता देवी, सुधीर महतो, पत्नी संजू देवी, प्रकाश कुमार, पत्नी गीता देवी, मिथुन कुमार, पत्नी लक्ष्मी कुमारी शामिल हैं।
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