प्रहरी संवाददाता/देवघर (झारखंड)। पञ्चांग समिति देवघर द्वारा बीते 9 मार्च को शिवगंगा तट स्थित सार्वजनिक भारती पुस्तकालय में श्री वैद्यनाथ पञ्चांग के सफलतापूर्वक 14 वर्ष पूर्ण होने पर आभार सभा का आयोजन किया गया। आभार सभा में श्री वैद्यनाथ पञ्चांग समिति के संरक्षक द्वारा आगत अतिथियों को सम्मानित किया गया।
जानकारी के अनुसार आभार सभा में पंडा धर्मरक्षिणी सभा के अध्यक्ष प्रो. डॉ सुरेश भारद्वाज, पूर्व महामंत्री दुर्लभ मिश्रा, वर्तमान महामंत्री निर्मल झा ‘मंटू’, संगठन मंत्री अरूणा नंद झा, वरीय उपाध्यक्ष चन्द्रशेखर खवाड़े व् संजय मिश्रा, पर्यावरणविद रजत मुखर्जी, शिक्षक रूपेश मिश्रा, बिहारी मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार और लेखक सुशील भारती, अखिल भारतीय तीर्थपुरोहित महासभा के पन्नालाल मिश्र सहित कई प्रबुद्ध जनों ने अपने सुझाव व् विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व महामंत्री दुर्लभ मिश्रा ने जबकि संचालन टुन्नू खवाड़े ने किया।
इस अवसर पर सर्वप्रथम वैद्यनाथ पञ्चांग समिति के संरक्षक वरिष्ठ पत्रकार सुशील भारती तथा अध्यक्ष राजेश झा द्वारा आगत अतिथियों का स्वागत चादर ओढ़ाकर, रूद्राक्ष माला पहनाकर तथा पञ्चांग भेट कर किया गया। इस अवसर पर संरक्षक सुशील भारती ने कहा कि यह कार्यक्रम संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण है। कहा कि यह फिसलन काल है, बावजूद इसके देवघर के प्रमोद श्रृंगारी व उनकी टीम केे हौसले को सलाम करता हूँ, जिन्होंने इस उत्तरदायित्व को समझ कार्य का बीड़ा उठाया। पंंडा धर्मरक्षिणी सभा के उपाध्यक्ष संजय मिश्रा ने इस क्षण को देवघर वासियों के लिये सुखद क्षण बताते हुए कहा कि आज इस पञ्चांग की बहुत जरूरत है, देवघर वासियों के लिये, खासकर जो देवघर से बाहर रहते हैं।
आभार सभा में अरुणा नंद झा ने कहा कि सभी पदाधिकारी ने पंचाग के लिए सहमति दी। गर्व की बात है कि आज सभी पंचागो में इस पंचाग ने अपनी उपयोगिता साबित करा दिया है। कहा कि वे जहां भी जाते हैं, सबो द्वारा पंचाग की तारीफ की जाती है। चन्द्रशेखर खवाड़े ने कहा कि वैद्यनाथ नाम से 14 शिवालय देश में है, ऐसे में कुछ विशेष होना यहां की बातों को मजबूती तथा तर्क के साथ रखा तो यह मानना पड़ा कि यही वैद्यनाथ है। उन्होंने कुछ सुझाव दिए जिसे स्वीकार भी किया गया। रजत मुखर्जी ने कहा कि बंगला में बहुत पंचाग है, लेकिन हिंदी में नहीं था। इस पंचाग को लाने वाली टीम को साधुवाद। रजत मुखर्जी ने अपनी एक कलाकृति दुर्लभ मिश्रा को सौंपा। पन्नालाल मिश्रा ने कहा कि देवघर आने वाले तीर्थ यात्रियों को अब तीर्थपुरोहित आसानी से शुभ मुहूर्त आदि बताते हैं।

मौके पर निर्मल मंटू ने कहा कि पंचाग की सोच को नमन है कि यह महज 14 वर्षों में हर घर में पहुंच बना लिया है। उन्होंने कहा कि अर्थ के बिना कुछ भी संभव नहीं है। जैसे टीम के संज्ञान में आया, सभा ने सहयोग किया आगे भी करेगी। उन्होंने टीम को पंचाग को और वृहद करने का आह्वान करते हुए कहा कि आप व्यापक रूप पर चिंतन कीजिए सभा आपके साथ हर पल तैयार है। दुर्लभ मिश्रा ने पंडा धर्मरक्षिणी सभा को धन्यवाद का पात्र बताते हुए पंचांग को पाणिनी की देन बताया। कहा कि दिन, तिथि, राशि, नक्षत्र, सूर्य व् चंद्र की गति की विस्तृत जानकारी होती है। उन्होंने कहा कि पुरोहित कर्म कर रहे हैं तो अनिवार्य रूप से पंचाग की जानकारी होनी चाहिए। यह राज्य स्तर का एकमात्र पंचाग है।
राज्य सरकार से भी इसका संपोषण होना चाहिए। उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि सूर्योदय काल की गणना देवघर से हो तो अच्छा रहेगा। गणना सटीक निकलेगा। उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा कि हालांकि यह कठिन है, लेकिन सुधार हो तो अच्छा रहेगा। कहा कि वह दिन दूर नहीं कि यह पंचाग पूरे भारत का नंबर वन पंचाग होगा।
संपादक प्रमोद श्रृंगारी ने पंचाग को बाबा की कृपा बतलाते हुए अपनी परेशानियां को रखा। कहा कि जो बातें छन के आई मुझे लगा कि हम सही रास्ते पर जा रहे हैं। चाहते हैं कि इसे वृहद रूप में लाया जाए, जिसमें सभी मंदिरों की साक्ष्य के साथ जानकारी हो। पुरोहित के लिए विभिन्न संस्कारों के लिए मंत्र हो, ताकि पुरोहित कर्म करने वालों को लाभ मिल सके। कहा कि अगर सभा चाहेगी तो बहुत सुधार हो सकता है। आप सहयोग दें। प्रो.डॉ सुरेश भारद्वाज ने कहा कि 14 वर्ष हो गए इसके लिए प्रमोद श्रृंगारी को धन्यवाद है। उन्होंने कहा कि प्रमोद श्रृंगारी ने संपर्क कर सहयोग मांगा जिसका इंतजार हम वर्षों से कर रहे थे। उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि अगला संस्करण निकले तो पंडा धर्मरक्षिणी सभा के इतिहास से वर्तमान तक समेटे हुए हो।
साथ ही शिवनाथ बलियासे को नमन करते हुए कहा कि इस पंचाग से उनके नाम को जोड़ा जाए, ताकि आमजनों के दिलों में उनकी स्मृति ताजा रहे। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थल पर पंचाग की जरूरत ज्यादा है, इसलिए जरूरी समझ कर सभा ने आत्मसात किया। उन्होंने पंचांग के पॉकेट एडिशन की वकालत करते हुए कहा कि साइज यही हो तो आसान हो जाता है। अंत में धन्यवाद ज्ञापन अध्यक्ष राजेश झा ने किया।
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