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श्रीहनुमत्वाटिका सूर्य नारायण मंदिर के वार्षिक महोत्सव पर अखंड अष्टयाम यज्ञ संपन्न

रात्रि कालीन बेला में विवाह संकीर्तन व सीताराम विवाह का आयोजन

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। मुजफ्फरपुर जिला के हद में कुढ़नी प्रखंड के रजला स्थित श्रीहनुमत् वाटिका सूर्य नारायण मन्दिर में पंचम वार्षिक महोत्सव के पावन अवसर पर चल रहे 24 घंटे का अखंड अष्टयाम यज्ञ 21 जनवरी को सफलता पूर्वक संपन्न हो गया।

जानकारी के अनुसार यज्ञ समापन के अवसर पर महाभण्डारा का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण किया। साथ हीं संध्याकालीन बेला में आयोजित विवाह संकीर्तन में बड़ी संख्या में भक्तों ने भाग लिया।

सारण जिला के हद में सोनपुर स्थित हरिहरक्षेत्र पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्य की अध्यक्षता में पारम्परिक विधि-विधान एवं हरिनाम संकीर्तन के साथ वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच बीते 20 जनवरी को कुढ़नी के रजला में उक्त यज्ञ का शुभारंभ किया गया था। इस अवसर पर रामचरित मानस का पाठ भी किया गया। महाभण्डारा के समापन के अवसर पर श्रीहनुमानजी एवं सूर्य नारायण भगवान का दिव्य औषधियों एवं दिव्य रसायनो से तिरुमंजन एवं नवीन वस्त्र धारण कराकर दिव्य श्रृंगार किया गया।

कलियुग राम नाम संकीर्तन से बडा़ कोई यज्ञ नहीं-जगद्गुरु स्वामी लक्ष्मणाचार्य

इस अवसर पर हरिहरक्षेत्र पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्य ने समस्त भक्तो को सम्बोधित करते हुए कहा कि मानव जीवन का सबसे महत्वपूर्ण कर्म यज्ञ है। यज्ञ नही तो जन्म नही। उन्होंने कहा कि मानव जीवन मे 16 प्रकार के संस्कार हैं। संस्कार के बिना मनुष्य पशु के समान हो जाता है। संस्कारोवैयज्ञः यानी संस्कार ही यज्ञ है। संस्कार यज्ञ के बिना सम्भव नही है। कहा कि संस्कार सत्संग से आता है। सत्संग बिना विवेक असम्भव है। स्वामी लक्ष्मणाचार्य ने कहा कि कलियुग राम नाम संकीर्तन से बडा़ कोई यज्ञ नहीं है। चलते – फिरते, खाते – पीते, हंसी- दिलग्गी में रामनाम उच्चारण हो जाये तो वह मंगलदायक होता है।

इस अवसर पर श्रीहनुमानजी एवं श्रीसूर्यनारायण भगवान का महाभिषेक किया गया। सहस्त्रनाम अर्चना भी किया गया। मौके पर सोनपुर से पधारे दिलीप झा, भोला सिंह, अरुण कुमार, चन्द कान्त झा, राज कुमार झा, संतोष झा, विनय कुमार झा, राम बहादुर झा, कैलास झा, गरीबनाथ झा, लक्ष्मीनारायण, पूनम झा, मीना झा, निर्मला देवी, नारायणी, रागिनी देवी, माला देवी, इन्दिरा देवी, कविता देवी एवं अन्य भक्तगण उपस्थित थे।

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