Advertisement

झारखंडी अस्मिता के प्रहरी स्व. छत्रु राम महतो संघर्ष, सिद्धांत व् जनसेवा की विरासत

रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। झारखंड की राजनीतिक और सामाजिक चेतना के इतिहास में स्वर्गीय छत्रु राम महतो का नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। वे केवल एक राजनेता हीं नहीं, बल्कि जनता के बीच से निकले ऐसे जननायक थे, जिन्होंने अपने पूरे जीवन को झारखंडी अस्मिता, सामाजिक न्याय और आम आदमी के अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया। उनका व्यक्तित्व सादगी, संघर्ष और सिद्धांतों की दृढ़ता का अद्भुत संगम था।

स्व. छत्रु राम महतो का जीवन संघर्षों से होकर गुज़रा। प्रारंभिक दौर से ही उन्होंने समाज में व्याप्त असमानता, शोषण और उपेक्षा को नज़दीक से देखा। यही अनुभव उन्हें जनआंदोलनों की ओर ले गया। झारखंड आंदोलन के दौरान उन्होंने अग्रिम पंक्ति में रहकर नेतृत्व किया और अलग राज्य की मांग को जन-जन की आवाज़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे मानते थे कि झारखंड केवल भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि यहाँ के रहिवासियों की पहचान, संस्कृति और स्वाभिमान का प्रतीक है।

राजनीतिक जीवन में जनता का विश्वास दिवंगत महतो की सबसे बड़ी पूंजी रही है। गोमिया विधानसभा क्षेत्र से पाँच बार निर्वाचित विधायक बनना इस विश्वास का प्रमाण है। वे हर चुनाव में जनता के बीच अपने काम और व्यवहार के दम पर उतरे और हमेशा खरे साबित हुए। एकीकृत बिहार सरकार में वित्त मंत्री के रूप में उन्होंने वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और जनहित को प्राथमिकता दी। सत्ता और पद उनके लिए कभी भी व्यक्तिगत लाभ का साधन नहीं बन सका।

स्व. छत्रु राम महतो की राजनीति का केंद्र बिंदु हमेशा गरीब, किसान, मज़दूर और वंचित समाज रहा है। वे समस्याओं को केवल सुनते नहीं थे, बल्कि उनके समाधान के लिए धरातल पर उतरकर काम करते थे। गाँवों का विकास, शिक्षा, सड़क, पानी और रोज़गार जैसे मुद्दे उनके एजेंडे में सर्वोपरि रहते थे। वे अक्सर कहा करते थे कि नेता वही है, जो आख़िरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति की चिंता करे। व्यक्तिगत जीवन में वे अत्यंत सरल, अनुशासित और सहज स्वभाव के थे। ऊँचे पदों पर रहते हुए भी उनका रहन-सहन आम आदमी जैसा ही रहा।

उनका दरवाज़ा हर किसी के लिए खुला रहता था, चाहे वह किसान हो, मज़दूर हो या छात्र। यही कारण था कि बोकारो जिला के हद में उनके पैतृक गांव पेटरवार सहित पुरा जिला के रहिवासी उन्हें नेता से ज़्यादा अपना अभिभावक मानते थे।
आज भले ही स्व. छत्रु राम महतो हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, संघर्ष और योगदान आज भी प्रासंगिक हैं।

उनकी स्मृति में 21 जनवरी को आयोजित होने वाला प्रतिमा अनावरण समारोह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उनकी जनसेवक की विरासत को नमन है। यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देगा कि सच्ची राजनीति वही है, जो सेवा, ईमानदारी और सामाजिक न्याय के रास्ते पर चलती है। स्व. महतो का जीवन एक प्रेरणा है यह याद दिलाने के लिए कि जब नेतृत्व ईमानदार हो, नीयत साफ़ हो और उद्देश्य जनहित हो, तब इतिहास स्वयं ऐसे व्यक्तित्व को अमर बना देता है।

Loading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *