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गत्यात्मक ज्योतिष के जनक विद्यासागर महथा का निधन, ज्ञान-जगत को अपूरणीय क्षति

प्रहरी संवाददाता/पेटरवार (बोकारो)। गत्यात्मक ज्योतिष के जनक एवं प्रख्यात ज्योतिषाचार्य विद्या सागर महथा जी का 19 जनवरी को दिल्ली में निधन हो गया। वे 87 वर्ष की आयु के थे। उनके निधन से परिवार, समाज और ज्ञान-जगत को अपूरणीय क्षति पहुँची है।

ज्ञात हो कि, ज्योतिष को वैज्ञानिक आधार प्रदान करने वाले दिवंगत महथा के परलोक गमन से देशभर के ज्योतिष, अनुसंधान एवं अकादमिक जगत में शोक की लहर व्याप्त है। दिवंगत गत्यात्मक ज्योतिष के संस्थापक थे। यह पद्धति पारंपरिक ज्योतिष को वैज्ञानिक दृष्टिकोण और गणनात्मक विधियों से जोड़ती है।

बताया जाता है कि अपने विशिष्ट शोध और नवाचार के बल पर दिवंगत महथा ने ज्योतिष विद्या को नई दिशा दी। उन्हें अखिल भारतीय ज्योतिष प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। साथ ही ज्योतिष वाचस्पति, ज्योतिष रत्न और ज्योतिष मनीषी जैसी प्रतिष्ठित उपाधियों से भी अलंकृत किया जा चुका है। उनके विचारों और शोध कार्यों से देश-विदेश के अनेक विद्वान, शोधार्थी और जिज्ञासु लाभान्वित हुए।

उन्होंने अपने जीवन के अंतिम समय में गत्यात्मक ज्योतिष के वैश्विक प्रचार-प्रसार तथा इससे होने वाली आय को लोक-कल्याण में लगाने की इच्छा व्यक्त की थी। उनकी इस अंतिम कामना को साकार करने के उद्देश्य से उनकी छह संतानों द्वारा बीते वर्ष 21 अगस्त को ग्राफ़िकल एस्ट्रोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की गई। साथ ही जनसेवा के लिए वीणाद्य पब्लिक ट्रस्ट की स्थापना की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है।

बताया जाता है कि दिवंगत महथा का अधिकांश अनुसंधान कार्य उनके जन्म स्थान बोकारो जिला के हद में पेटरवार में हुआ। वे पिछले दो दशकों से अधिक समय से परिवार सहित दिल्ली में रह रहे थे। उनके अनुसंधान पर आधारित गत्यात्मक ज्योतिष नामक मोबाइल ऐप भी शीघ्र ही लॉन्च होने वाला है, जिससे आमजन को प्रत्यक्ष लाभ मिल सकेगा।

उनके आकस्मिक निधन पर दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य, परिवहन एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ पंकज कुमार सिंह सहित कई गणमान्य जनों ने शोक व्यक्त किया है। वहीं गोमिया के पूर्व विधायक डॉ लम्बोदर महतो ने गहरा दुःख प्रकट करते हुए कहा कि विद्या सागर महथा का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा। कहा कि दिवंगत महथा भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, शोध और ज्ञान आने वाली पीढ़ियों को निरंतर मार्गदर्शन देता रहेगा।

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