एस. पी. सक्सेना/बोकारो। झारखंड में होनेवाले निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक क्षेत्र के अलावा सामाजिक स्तर पर सक्रियता धीरे-धीरे जोर पकड़ने लगा है। ऐसे में बोकारो के चास में भी सरगर्मी देखा जा रहा है।
नगर निगम चास के मेयर पद पर क्लीन स्विप करने की फिराक में लगे कई दावेदारों की सोंच पर चास स्थित के. एम. मेमोरियल अस्पताल के निदेशक डॉ विकास पांडेय की उम्मीदवारी की मात्र चर्चा ने हीं कइयों के माथे पर बल ला दिया है। अभी से यह हाल है तो, यदि डॉ विकास चास नगर निगम चुनाव में मेयर पद पर जब नामांकन करेंगे तब अन्य दावेदारों की हालत देखने लायक होगा।
ज्ञात हो कि समाज सेवा में अग्रणी रहे डॉ विकास की पारिवारिक पृष्टभूमि सफल राजनीति से जुड़ा रहा है। उनके दादा दिवंगत कृष्ण मुरारी पांडेय ने अपने जीवनकाल में कई ऐसे सामाजिक व् राजनीति के क्षेत्र में अहम योगदान दिया है कि आज भी बेरमो कोयलांचल में मिल का पत्थर साबित हो रहा है। दिवंगत कृष्ण मुरारी पांडेय ने अपने जीवनकाल में कांग्रेस के बोकारो जिलाध्यक्ष रहते हुए वर्ष 1995 में होनेवाले विधानसभा चुनाव में समर्थकों के लाख दबाबों के बावजूद खुद चुनाव नहीं लड़ने का सार्वजनिक फैसला लिया था।
तब उनके इस निर्णय ने सबको हक्का-बक्का कर दिया था। दिवंगत के त्याग के आगे उनके समर्थकों को अंततः नतमस्तक होना पड़ा। परिणाम स्वरूप कांग्रेस के राजेंद्र प्रसाद सिंह को विधानसभा चुनाव में जीत मिली थी। इस कड़ी में डॉ विकास के पिता रविंद्र कुमार पांडेय ने ऐसी मिशाल कायम की जो असंभव प्रतीत होता है। पांडेय पांच बार लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज कर गिरिडीह का प्रतिनिधित्व कर चुके है।
उनके पास राजनीति का अच्छा अनुभव है, जिसका लाभ संभवतः चास मेयर चुनाव में यदि उनके पुत्र डॉ विकास दावेदारी पेश करते है तो अवश्य मिलेगा। ऐसे में क्लीन स्विप का सपना देख रहे उनके विरोधियों को परेशान होना लाजमी है। देखना है क्या सचमुच डॉ विकास चास मेयर चुनाव लड़ेंगे? यदि हां तो निर्णय व् चुनाव परिणाम दिलचस्प होने के आसार है।
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