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विक्की मोबलिंचिंग में पुलिस द्वारा एससी/एसटी एक्ट नहीं लगाना संदेहास्पद-नायक

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड की राजधानी रांची से सटे बुडमू प्रखंड के चांया गांव में विक्की नायक की जातिगत रुप से की गई मोब लिंचिंग व् हत्या मामले में थाना द्वारा दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) में एससी/एसटी एक्ट नहीं लगाना अपराधियों को बचाना जैसा है। राज्य की हेमंत सरकार और डीजीपी मामले में संज्ञान ले, नही तो आंदोलन होगा।

उपरोक्त बाते वरिष्ठ कांग्रेसी नेता विजय शंकर नायक ने 18 जनवरी को कही। उन्होंने एफआईआर में एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(V), धारा 3(2)(VI), अन्य धारा 3(1)(R) यदि नहीं जोड़ा गया, तो पुलिस पर धारा 4 के तहत कार्रवाई और उच्च न्यायालय में याचिका दायर किया जाएगा। नायक ने कहा कि उपरोक्त धाराएं जोड़कर सख्त सजा दिलाने का और परिवार को उचित मुआवजा दिलाने की मांग को लेकर जल्द ही आंदोलन किया जाएगा।

ज्ञात हो कि रांची जिले के बुडमू थाना क्षेत्र के चांया गांव में बीते 16 जनवरी को स्थानीय रहिवासी तुलसी नायक के 18 वर्षीय पुत्र विक्की नायक को मोटर पंप चोरी के संदेह में गांव की बैठक में बुलाकर माता-पिता के सामने लाठी-डंडों से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। नायक के अनुसार उक्त घटना जातिगत घृणा से प्रेरित है, क्योंकि विक्की अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय से थे और आरोपी गैर-एससी/एसटी।

उन्होंने कहा कि बुडमू थाना द्वारा किसी के दबाव मे दर्ज प्राथमिकी (एफआईआर) में अभी तक एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की कोई धारा नहीं लगाई गई है, जो अत्यंत गंभीर और आपत्तिजनक है। जिससे लगता है कि अपराधियो को पुलिस जान बुझ कर बचाना चाह रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कांग्रेसी नेता नायक ने सख्त लहजे में कहा कि यह जातिगत अत्याचार का मामला है, फिर भी एक्ट लागू नहीं किया गया। वे मांग करते है कि इस केस में एससी/एसटी एक्ट को लगाया जाए।

जिसमें मुख्य रुप से धारा 3(2)(V): हत्या (बीएनएस धारा 101/103, 3(2)(V-A), 3(1)(R) (सार्वजनिक अपमान, यदि लागू। यदि नहीं जोड़ा गया, तो पुलिस पर धारा 4 के तहत कार्रवाई और उच्च न्यायालय में याचिका भी दायर किया जायेगा। कहा कि मामले की फास्ट-ट्रैक स्पेशल कोर्ट में त्वरित सुनवाई हो। एससी/एसटी एक्ट नियम 1995 के तहत हत्या में अंतरिम राहत तथा अंतिम मुआवजा। केंद्र की डॉ अंबेडकर योजना से ₹5 लाख तक। झारखंड राज्य से ₹8-10 लाख तक (कुल मिलाकर पर्याप्त राशि), आश्रित को सरकारी नौकरी व् परिवार जनों को सुरक्षा दे। वे मांग करते हैं कि बुडमू थाना/पुलिस प्रशासन तुरंत एससी/एसटी एक्ट की धाराएं लागू कर अपराधियों को सजा दिलाए और परिवार को न्याय व आर्थिक सहायता प्रदान करे। यह दलित समुदाय के खिलाफ अत्याचार का स्पष्ट मामला है। कहा कि हम न्याय के लिए संघर्षरत हैं।

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