एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड के बुढ़मू चांया गांव में दलित युवक की नृशंस मॉब लिंचिंग केवल हत्या नहीं, बल्कि संविधान और मानवता की सामूहिक हत्या है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नामजद हत्यारों की गिरफ्तारी में कोताही पर उग्र आंदोलन होगा।
बुढ़मू प्रखंड के चांया गांव में 18 वर्षीय दलित युवक विक्की नायक की पीट-पीटकर की गई हत्या ने झारखंड ही नहीं, पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर दिया है। यह कोई सामान्य घटना नहीं, बल्कि सुनियोजित भीड़-हिंसा (मॉब लिंचिंग) है, जिसमें कानून को हाथ में लेकर एक निर्दोष दलित युवक की जान ली गई।
उपरोक्त बातें 17 जनवरी को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व कांके विधायक प्रत्याशी विजय शंकर नायक ने कही। उन्होंने कहा कि प्राप्त तथ्यों के अनुसार मोटर चोरी के आरोप में पहले ग्रामीण बैठक बुलाई गई। इसके बाद कथित आरोपी विक्की नायक से जबरन अपराध स्वीकार कराया गया और उसके बाद उसके माता-पिता की मौजूदगी में बेरहमी से लात-घूंसे मारे गए, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। यह कृत्य भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 (समानता का अधिकार, भेदभाव-निषेध और जीवन व व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का खुला और घोर उल्लंघन है।
नायक ने बताया कि मृतक की मां भुटकी देवी के अनुसार बीते 11 जनवरी की रात कामेश्वर यादव उर्फ सरपंच और विशुन यादव के कुएं से मोटर चोरी होने की बात कही गई। इसे लेकर बीते 15 जनवरी की शाम कामेश्वर यादव तथा तुलसी नायक उसके घर पहुंचकर उसके पुत्र विक्की पर चोरी का आरोप लगाया। अगले दिन 16 जनवरी को गांव में बैठक बुलाकर जुर्म कबूल कराने की साजिश रची गई। इसी बीच रात में किसी ने मोटर कुएं पर वापस रख दी। बताया कि 16 जनवरी की सुबह विक्की को गांव के दो स्थानीय रहिवासी मोटरसाइकिल पर बैठाकर बैठक में ले गए, जहां जबरन कबूलनामे के बाद उसे बेरहमी से पीटा गया।
नायक ने बताया कि इस जघन्य अपराध में रहिवासी सरुला मुंडा, बबीया मुंडा, रामजी महतो, मनोज यादव, बिनोद मुंडा सहित अन्य की संलिप्तता बताई जा रही है। उन्होंने दो टूक कहा कि भीड़-न्याय कानून का विकल्प नहीं हो सकता। यह दलितों और गरीबों के खिलाफ जारी सामाजिक हिंसा का भयावह चेहरा है। दोषियों को संरक्षण देना या मामले को कमजोर करना राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी से पलायन होगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस गंभीर मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, डीजीपी तदासा मिश्रा, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिले और दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी सजा सुनिश्चित हो।
प्रेषित ईमेल में सभी नामजद आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की कठोरतम धाराओं में प्राथमिकी दर्ज हो, पीड़ित परिवार को कम से कम 50 लाख रुपये मुआवजा एवं एक आश्रित को सरकारी नौकरी, मामले की न्यायिक जांच कर फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई, गांव में पीड़ित परिवार और गवाहों को पूर्ण सुरक्षा, अन्यथा यह संदेश जाएगा कि सच बोलने वालों की जान खतरे में है मांग शामिल है।
नायक ने कहा कि यह सिर्फ विक्की नायक की हत्या नहीं है। सवाल है कि क्या दलित होना आज भी मौत की सजा है? अगर इस लिंचिंग पर राज्य चुप रहा, तो यह चुप्पी अगली हत्या का लाइसेंस होगी। इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि नामजद हत्यारों की गिरफ्तारी में कोताही बरती गई, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। कहा कि यह मामला केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि कानून के राज बनाम भीड़ के राज की निर्णायक परीक्षा है। यदि दोषियों को सख्त सजा नहीं मिली, तो यह संदेश जाएगा कि दलितों की जान सस्ती है, जो किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं।
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