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आलोचनात्मक और रचनात्मक शिक्षण पद्धति नई शिक्षा नीति की आत्मा है-एआरओ

डीएवी कथारा में दो दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला का समापन

एस. पी. सक्सेना/बोकारो। बोकारो जिला के हद में डीएवी पब्लिक स्कूल सीसीएल कथारा में बीते 27 दिसंबर से आयोजित दो दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला का विधिवत समापन 28 दिसंबर को किया गया। उक्त कार्यशाला
आलोचनात्मक और रचनात्मक सोच विषय पर आधारित थी।

जानकारी देते हुए डीएवी कथारा के शिक्षक रंजीत कुमार सिंह तथा बी. के. दसौंधी ने बताया कि आयोजित कार्यशाला में साधनसेवी अनुराधा सिंह एवं राहुल रॉय ने वर्तमान शिक्षा प्रणाली में आलोचनात्मक और रचनात्मक सोच विचारधारा के महत्व पर प्रकाश डाला। कहा कि समय के साथ शिक्षा को भी परिवर्तनशील होना चाहिए, तभी विद्यार्थी हर विकट परिस्थिति का सामना कर अपनी शिक्षा को सार्थक कर पाएंगे।

कार्यशाला में विभिन्न क्रियाकलापों द्वारा विषय को रोचक बनाने का प्रयास किया गया, जो सफल रहा। शिक्षकों ने बढ़-चढ़कर कार्यशाला में सहभागिता निभाई एवं सभी ग्राह्य बिन्दुओं को स्वीकारा। इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य सह झारखंड जोन-आई के सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी (एआरओ) डॉ जी.एन.खान ने स्वयं भी कार्यशाला में सक्रिय भूमिका निभाई। समापन समारोह में सर्वप्रथम उन्होंने दोनों साधनसेवियों को साधुवाद देते हुए कहा कि तमाम शिक्षक वृंद इस प्रशिक्षण कार्यशाला में बताई गई बातों का अपनी कक्षाओं में अक्षरशः पालन करेंगे।

प्राचार्य ने कहा कि शिक्षा ही एकमात्र ऐसा हथियार है जिसके माध्यम से युग परिवर्तन संभव है। हम शिक्षक ही ऐसे क्रांतिवाहक हो सकते हैं जो वर्ष 2047 में भारत को एक विकसित राष्ट्र की कतार में लाकर खड़ा करेंगे। उन्होंने कहा कि समय-समय पर आयोजित होने वाली इस प्रकार की कार्यशालाएं शिक्षकों के लिए काफी लाभप्रद सिद्ध होती है।

कहा कि शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में होने वाले बदलाव से अवगत होते हैं। वे शिक्षकों से अनुरोध करेंगे कि वे अपने आप को शिक्षा का सर्वश्रेष्ठ सेनापति बनाएं, जिनके द्वारा प्रशिक्षित किए गए सिपाही जीवन की हर जंग जीत लें। उक्त कार्यशाला को सफल बनाने में डीएवी कथारा विद्यालय परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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