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महाराजा अहिबरन ने बरनवाल समाज की रखी थी नींव-विधायक

बरनवाल समाज द्वारा महाराजा अहिबरन समारोह का आयोजन

एन. के. सिंह/फुसरो (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में फुसरो में 26 दिसंबर को बरनवाल समाज द्वारा महाराजा अहिबरन जयंती समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में वैश्य समाज के सैकड़ो महिला, पुरुष व् बच्चे शामिल हुए।

इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि बेरमो विधायक कुमार जयमंगल सिंह ने कहा कि महाराज अहिबरन बरनवाल समाज के पुरोधा थे। उन्होंने कहा कि प्राचीन समय में बुलंदशहर भगवान अहिबरन का राज्य था। वे अपनी प्रजा के साथ समान व्यवहार करते थे। समाज को अपने पूर्वजों के किए कार्यों और विचारों का अनुसरण अवश्य करना चाहिए, ताकि समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर किया जा सके। कहा कि बरनवाल वैश्य समुदाय का काफी गौरवशाली इतिहास रहा है। उन्होंने कहा कि राजा अहिबरन से बरनवाल समाज की उत्पत्ति हुई।

महाराजा अहिबरन बुलंदशहर के राजा थे। बुलंदशहर में महाराजा अहिबरन का किला आज भी मौजूद है। कहा जाता है कि धन की देवी लक्ष्मी ने राजा अहिबरन एवं उनके वंशजों को सुख -समृद्धि का आशीर्वाद दिया था। अयोध्या के सूर्यवंशी राजा मान्धाता के दो पुत्र गुनाधि एवं मोहन थे। मोहन के वंशज वल्लभ और उनके पुत्र अग्रसेन हुए। महाराजा अग्रसेन ने अग्रवाल व अग्रहरि वैश्य वंश की शुरुआत की, तो दूसरे पुत्र गुनाधि के पुत्र परामल और उनके पौत्र अहिबरन हुए। महाराज अहिबरन ने बरनवाल समुदाय की नींव रखी।

विशिष्ट अतिथि बेरमो के पूर्व विधायक योगेश्वर महतो बाटूल ने कहा कि बरनवाल समाज उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल एवं पड़ोसी देश नेपाल में बहुतायात है। इस अवसर पर महिला समिति की सदस्यों ने अहिबरन वंदना प्रस्तुत की। कार्यक्रम मे विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गये। संचालन गुडु बरनवाल ने किया। जयंती समारोह मे मुख्य रूप से नप के पूर्व अध्यक्ष राकेश कुमार सिंह व पूर्व उपाध्यक्ष छेदी नोनिया के अलावे समाज के विनय वरणवाल, अर्चना वरणवाल, रामचन्द्र वरणवाल, पिन्टू वरणवाल, अवध वरणवाल, अविनाश वरणवाल सहित समाज के सैकड़ो महिला -पुरुष और बच्चे मुख्य रूप से शामिल हुए।

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