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रांची नगर निगम में मेयर आरक्षण समाप्त करने के खिलाफ नायक ने खोला मोर्चा

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड की राजधानी रांची के नगर निगम में अनुसूचित जाति (एससी) मेयर आरक्षण समाप्त कर मात्र दो सीट देने के विरोध में आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केन्द्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने मोर्चा खोल दिया है।

नायक ने राज्य के मुख्यमंत्री, निर्वाचन विभाग, नगर विकास विभाग एवं रांची डीसी को भेजा गया आधिकारिक ईमेल भेजकर हेमंत सरकार से जवाब मांगा है। आदिवासी मुलवासी नेता विजय शंकर नायक ने रांची नगर निगम में आरक्षण रोटेशन के तहत अनुसूचित जाति के मेयर आरक्षण को समाप्त कर अब सिर्फ दो सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किए जाने के गंभीर मुद्दे पर 22 दिसंबर को झारखंड सरकार के संबंधित उच्च अधिकारियों को आधिकारिक ईमेल भेजकर कड़ा आपत्ति दर्ज कराई है।

उन्होंने ईमेल मुख्यमंत्री झारखंड (हेमंत सोरेन सरकार), राज्य निर्वाचन विभाग, नगर विकास विभाग तथा रांची डीसी कार्यालय को भेजा है, जिसमें साफ शब्दों में कहा गया है कि एससी मेयर आरक्षण खत्म कर सिर्फ दो सीट? यह बदलाव नहीं, समुदाय को कमजोर करने की चाल है। अब यह अन्याय स्वीकार नहीं होगा। यह निर्णय केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि अनुसूचित जाति समुदाय के राजनीतिक अधिकार, प्रतिनिधित्व और सम्मान पर सीधा प्रहार है।

कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 243-T के अनुसार स्थानीय निकायों में अनुसूचित जाति को उनकी वास्तविक जनसंख्या अनुपात के अनुरूप प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। इसके बावजूद आरक्षण घटाना लोकतांत्रिक भावना के साथ अन्याय है। नायक ने अपने भेजे गये ईमेल के माध्यम से संबंधित विभागों और हेमंत सरकार को स्पष्ट कहा है कि एससी समुदाय के राजनीतिक अधिकारों से समझौता स्वीकार नहीं होगा। यह निर्णय पुनर्समीक्षा योग्य ही नहीं, बल्कि सुधार योग्य है। यह आरक्षण बदलाव नहीं बल्कि राजनीतिक कमजोर करने की सुनियोजित कोशिश प्रतीत होती है।

इसलिए एससी मेयर आरक्षण समाप्त करने के निर्णय की तत्काल समीक्षा की जाए। एससी सीटों को पुनः जनसंख्या आधारित और न्याय संगत आधार पर बढ़ाया जाए। साथ हीं पारदर्शिता के साथ संशोधित अधिसूचना जारी की जाए।उन्होंने कहा कि यदि सरकार और संबंधित एजेंसियों ने इस गंभीर विषय पर संवेदनशीलता नहीं दिखाई, तो इसे अनुसूचित जाति समुदाय को हाशिये पर धकेलने की ठोस साजिश माना जाएगा और इसके विरुद्ध जन आंदोलन एवं कानूनी लड़ाई दोनों शुरू किए जाएंगे।

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