उक्त मामले को उठाने की लगायी जा रही है कीमत
एस.पी.सक्सेना/ बोकारो। बोकारो जिला के हद में बोकारो थर्मल (Bokaro Thermal) थाना क्षेत्र में एक सीसीएल (CCL) अधिकारी द्वारा निजी विद्यालय के महिला कर्मी के साथ यौन शोषण का चर्चित मामला अब धीरे- धीरे ठंडा पड़ता दिख रहा है। मामले को दर्ज हुए लगभग दस दिन से भी अधिक का समय बीत चुका है। मगर अभी तक आरोपी अधिकारी पर किसी तरह की कार्यवाही होती नही दिख रही है। आरोपी अधिकारी नियमित अपने कार्यालय आना जाना कर रहे हैं और खुले आम घूमते नजर भी आ रहे हैं।
दीगर बात है की उनके कुछ शुभचिंतक उनकी सुरक्षा कवच बन दिन भर उनके दाहिने बायें घुमते नजर आ रहे हैं। क्षेत्र में यह चर्चा का विषय बना हुआ है की यदि इस प्रकार का कृत्य किसी आम आदमी द्वारा किया जाता तो ऐसे मामले में पुलिस उसे कब का पकड़कर जेल की सलाखों में भेज दिया होता। मगर यह आरोप एक गरीब प्राइवेट महिला कर्मी द्वारा एक हाईप्रोफाइल अधिकारी से जुड़ी है। इसलिए संभवतः पुलिस प्रशासन भी इस मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश में जुटी है। पूरे बोकारो जिला में इस बात की चर्चा काफी गर्म है की अधिकारी के बचाव में अनगिनत छुटभैया नेता व कई श्रमिक संगठन के नेता गुपचुप तरीके से इस बात की कोशिश में जुटे हैं कि किसी तरह पीड़िता सह शिकायतकर्ता युवती को कुछ प्रलोभन देकर मामले को हीं वापस करवा दिया जाए।
उच्च स्तरीय सेटिंग, गेटिंग का खेल जारी
अपुष्ट जानकारी के अनुसार इस बात के लिए युवती को मना भी लिया गया है और इसके एवज में एक मोटी रकम भी तय कर दिया गया है। हालांकि उपरोक्त बातो का कोई पुख्ता प्रमाण नही मिला है। मगर समय के साथ बदलते घटना क्रम इसी ओर इशारा करती है। खास बात यह की घटना स्थल सीसीएल का कथारा अतिथि गृह पूर्व में भी इस प्रकार के मामलों में खासे चर्चित रहा है। जब सीसीएल के सहयोग से चलाये जा रहे स्थानीय एक विद्यालय के प्राचार्य द्वारा उस विद्यालय के एक अस्थाई शिक्षिका को भगाया गया था। कालांतर में भी यहां पदस्थापित एक महाप्रबंधक (अब सेवानिवृत्त) द्वारा दूसरी जगहों से महिला बुलाकर रंगरेलियां मनाने की बातें सुर्खियों में रहा है। कुल मिलाकर देखा जाए तो कथारा का अतिथि गृह इस प्रकार के लगभग आधा दर्जन घटनाओं का गवाह रहा है।
बता दें की इसी तरह का दो मामला कुछ वर्षों पूर्व बोकारो थर्मल थाने में दर्ज हुआ था। जिसमें एक मामले में एक प्रतिष्ठित नेता और दूसरे मामले में एक मीडिया कर्मी को जेल जाना पड़ा था। मगर इस मामले में पुलिस द्वारा इतनी सुस्ती क्यो? दुसरी तरफ यदि उपरोक्त युवती ने ब्लेकमेल करने की मंशा से अधिकारी पर झुठा मुकदमा दर्ज किया है तो फिर अधिकारी उस युवती पर मानहानि का केस क्यो नही दर्ज करवा रहे हैं? सवाल है की एक ही आरोप के कानून के दो पहलू हैं क्या अमीरो व प्रतिष्ठित व्यक्ति के लिए अलग और गरीबो व मध्यमवर्गीय लोगो के लिए अलग? मगर पुलिस की इस मामले में खामोशी व सुस्ती इस बात की ओर सीधे सीधे इशारा करती है की आरोपी अधिकारी का प्रभाव इन पर पुरी तरह हावी है। इधर पीड़िता आखिर इस मामले में क्यो एकाएक खामोशी इख्तियार कर ली है। यह भी एक बहुत बढ़ा सवाल है। खैर हमे इस मामले के लिए अभी और इंतजार करना होगा। तभी इस हाईप्रोफाइल घटना सह नाटक का पटाक्षेप देखने को मिलेगा।
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