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गरगा व् स्वर्णरेखा को प्रदूषण संरक्षण हेतु पर्यावरण संस्थान द्वारा राज्यपाल से गुहार

रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। प्रदूषण की मार से मर रही बोकारो की जीवनरेखा गरगा (गर्ग-गंगा) नदी और झारखंड की जीवनरेखा स्वर्णरेखा नदी को बचाने हेतु स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण संस्थान का चार सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल संस्थान के महासचिव शशि भूषण ओझा ‘मुकुल’ के नेतृत्व में 13 दिसंबर को झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार से रांची स्थित लोक भवन में मिलकर एक ज्ञापन देते हुए करुण गुहार लगाया गया।

प्रतिनिधि मंडल में महासचिव मुकुल के अलावा संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष रघुवर प्रसाद, उपाध्यक्ष अखिलेश ओझा और महिला संगठक दिव्या शामिल रहीं।
बताया जाता है कि मुकुल ओझा ने राज्यपाल को बोकारो की गरगा नदी की दुर्दशा का वर्णन करते हुए कहा कि बोकारो इस्पात संयंत्र की आवासीय कॉलोनियों तथा चास नगर निगम के गंदे नालों के नदी में अनवरत प्रवाह से इस नदी का जल प्रदूषित होकर न सिर्फ काला हो गया है, बल्कि अब इससे दुर्गंध भी निकलने लगी है।

कहा गया कि यह नदी अब गंदे नाले में परिवर्तित हो गई है। कहा गया कि स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण संस्थान द्वारा कई बार राज्य सरकार, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, बोकारो जिला प्रशासन, चास नगर निगम और सेल बोकारो इस्पात संयंत्र को पत्र लिखकर गरगा नदी को बचाने की गुहार लगाई गई है, मगर इनके द्वारा कोई भी कारवाई नहीं करना अत्यंत ही चिंतनीय और निंदनीय है। जबकि नदी को प्रदूषित करना दंडनीय अपराध है। इस नदी के तट को कई स्थानों पर भू-माफियाओं, बिल्डरों और बड़े ओहदे वालों ने अतिक्रमित भी कर लिया है।

राज्यपाल को बताया गया कि गरगा नदी का संबंध भगवान श्रीकृष्ण के जन्म हेतु ऋषिश्रेष्ठ गर्ग द्वारा आयोजित यज्ञ से है। किंवदंती है कि यज्ञ में पवित्र जल हेतु ऋषिश्रेष्ठ गर्ग ने अपने तपोबल से भू गर्भ से एक जलधारा उत्पन्न किया, जिसे गर्ग गंगा कहा गया। जो बाद में अपभ्रंश होकर गरगा नाम से विख्यात हो गई। कहा गया कि इस नदी का उद्गम वर्तमान में बोकारो जिला के हद में कसमार प्रखंड स्थित कलौंदी बांध जलकुंड से है।

कहा गया कि इसी प्रकार झारखंड की जीवन रेखा स्वर्णरेखा नदी भी प्रदूषण की मार से कराह रही है। बताया गया कि एक समय था जब इस नदी के बालू में सोने का कण मिला करता था, परन्तु अब तो इस नदी जल में कोई पैर भी नहीं रखना चाहता। यह नदी राज्य की राजधानी रांची में ही जब प्रदूषण की मार सह रही है और कोई भी सरकारी तंत्र इसे बचाने हेतु किसी भी प्रकार का प्रयास नहीं कर रहा है तो राज्य के अन्य स्थानों पर नदियों की क्या दुर्दशा होगी, यह अत्यंत ही चिंता का विषय है।

राज्यपाल से निवेदन किया गया कि गरगा नदी और स्वर्णरेखा नदी सहित राज्य की सभी नदियों के प्रदूषण की स्थिति को जांच कराते हुए दोषियों पर उचित दंडात्मक कारवाई हेतु सख्त निर्देश देने का कष्ट करें, जिससे नदियों के अस्तित्व की रक्षा हो और जल संकट से बचा जा सके। नदियों के प्रदूषण को राज्यपाल गंगवार द्वारा गंभीरता से लेते हुए इस पर कानून सम्मत सख्त कारवाई करने का भरोसा दिया गया।

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