रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। किताब–कॉपी की दुनिया में अभी कदम रख रही 3 वर्षीया ऋषिका के लिए होमवर्क ऐसा डर बन गया, जिसने उसकी मुस्कान छीन ली।
बोकारो के सेक्टर आठ स्थित किड्स केयर एकेडमी में होमवर्क नहीं करने की गलती पर मासूम को ऐसी सजा मिली कि उसके नन्हे गाल सूज गए और डर के मारे वह एक दिन तक खाना भी नहीं खा सकी। बताया जाता है कि बच्ची के पिता ऋषितोष कुमार जब बेटी का सूजा चेहरा देख स्कूल पहुंचे, तो मामला प्रशासन तक जा पहुंचा। उन्होंने एसडीओ चास प्रांजल ढांडा को तस्वीरें भेजकर न्याय की गुहार लगाई है। मामला गंभीर देख एसडीओ ने मजिस्ट्रेट राजबाला के नेतृत्व में जांच कमेटी गठित कर दी, जो पीड़ित परिवार के घर पहुंची।
जांच में सामने आया कि मासूम को जरूरत से ज्यादा पिटाई किया गया था। मजिस्ट्रेट ने चोट के निशानों की पुष्टि की और बताया कि प्राचार्य ने अपनी गलती स्वीकार भी की है। प्रशासन ने फिलहाल सुधार का मौका देते हुए सख्त चेतावनी दी है। घटना के बाद बच्ची के पिता का दर्द छलक पड़ा। उन्होंने कहा कि वे न्याय चाहते हैं, लेकिन प्राचार्य के राजनीतिक संबंधों के कारण भय का माहौल है। यह घटना न सिर्फ एक परिवार का दर्द है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि क्या नन्हे बच्चों को पढ़ाने का तरीका डर और उसकी पिटाई हो सकता है?
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