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बाहरी बहाली के खिलाफ गुवा सेल में दूसरे दिन भी हंगामा, उत्पादन व डिस्पैच ठप्प

सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। पश्चिम सिंहभूम के हद में सेल गुवा लौह अयस्क में 20 बाहरी कामगारों की कथित बहाली के विरोध में दूसरे दिन 9 दिसंबर को भी संयुक्त यूनियनों का उग्र प्रदर्शन जारी रहा।

जनरल ऑफिस के समक्ष बड़ी संख्या में जुटे यूनियन पदाधिकारियों एवं मजदूरों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए चेतावनी दी कि यदि बाहरी कामगारों की बहाली तत्काल प्रभाव से नहीं रोकी गई, तो उत्पादन और डिस्पैच अनिश्चितकालीन बंद रहेगा। ज्ञात हो कि बीते 8 दिसंबर की शाम से शुरू हुआ यह विरोध दूसरे दिन और तीव्र हो गया है।

संयुक्त यूनियनों का आरोप है कि गुवा सेल में स्थानीय मजदूरों और बेरोजगार युवाओं की अनदेखी करते हुए बाहर के कामगारों को नौकरी दी जा रही है, जो क्षेत्रीय हक के साथ गंभीर खिलवाड़ है। इस निर्णय से ठेका मजदूरों और स्थानीय परिवारों में भारी आक्रोश है। बताया जाता है कि यूनियन नेताओं के निर्देश पर बीते 8 दिसंबर की रात्रि पाली से सभी बसों को रोक दिया गया, जिसके कारण उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया और 9 दिसंबर को भी कामकाज बाधित रहा।

आंदोलन को लेकर यूनियनों का तर्क है कि जब तक 20 बाहरी कामगारों की बहाली पर रोक नहीं लगती, तब तक डिस्पैच भी अनिश्चितकालीन बंद रहेगा। इससे गुवा सेल की उत्पादन व्यवस्था और परिवहन प्रणाली पर गंभीर असर पड़ रहा है, जिसका प्रभाव आगे बड़े पैमाने पर देखने को मिल सकता है। इसी बीच सेल प्रबंधन ने स्थिति को संभालने के लिए संयुक्त यूनियन नेताओं के साथ बैठक की।

बैठक में सेल के मुख्य महाप्रबंधक चंद्रभूषण कुमार ने स्पष्ट किया कि गुवा सेल में सात बाहरी कामगारों की ही बहाली की गई है और सभी युवक झारखंड के ही हैं। यूनियन नेताओं ने आपत्ति जताते हुए कहा कि गुवा क्षेत्र में भी अनेक बेरोजगार युवक-युवतियां मौजूद हैं, ऐसे में बाहर के जिलों से नियुक्त करने की आवश्यकता क्यों पड़ी। साफ कहा गया कि जब तक इन सातों की बहाली रद्द नहीं होगी, आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा।

प्रदर्शन स्थल पर संयुक्त यूनियनों के प्रमुख पदाधिकारी भारी संख्या में मौजूद रहे। इनमें झारखंड मजदूर संघर्ष संघ के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पांडेय, महामंत्री अंतर्यामी महाकुड़, बोकारो स्टील वर्कर्स यूनियन इंटक के महामंत्री विश्वजीत तांती, सारंडा युवा बेरोजगार संघ के अध्यक्ष उदय कुमार सिंह, दोनों पंचायत की मुखिया पद्मिनी लागुरी व चांदमनी लागुरी, जिला परिषद सदस्य देवकी कुमारी, विभिन्न गांवों के ग्रामीण मुंडा और मानकी शामिल थे।

इनके अलावा बड़ी संख्या में ठेका मजदूर, सफाईकर्मी और स्थानीय युवा भी प्रदर्शन में शामिल हुए। यूनियन नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन केवल बहाली विवाद का विरोध नहीं, बल्कि स्थानीय रहिवासियों के रोजगार अधिकार की लड़ाई है। यदि प्रबंधन ने तत्काल सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो यह आंदोलन और व्यापक एवं उग्र रूप ले सकता है।

 

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