एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। जब संस्थाएँ सो जाती हैं तब प्रतिभाएँ मर जाती हैं। अब समय आ गया है कि सरकार और बीसीसीआई सक्रिय होकर झारखंड क्रिकेट को सुधारें। वादे नहीं, बदलाव चाहिए। झारखंड में क्रिकेट की कराहती आवाज़ के आगे प्रतिभा रो रही है। व्यवस्था सो रही है। अब बदलाव अनिवार्य है।
झारखंड क्रिकेट में चल रही लगातार अव्यवस्था, टिकट घोटाले, सुरक्षा चूक और प्रतिभावान खिलाड़ियों की उपेक्षा ने राज्य की खेल प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुँचाया है। इसे लेकर आदिवासी-मूलवासी जनाधिकार मंच के केन्द्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने मोर्चा खोल दिया है। नायक ने चिंता व्यक्त करते हुए इस दिशा में राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एवं बीसीसआई को 8 दिसंबर को पत्र लिखकर इमेल भेजा है। ईमेल में उन्होंने कहा है कि बीते 7 दिसंबर को झारखंड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन (जेएससीए) के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने दावा किया कि वे झारखंड क्रिकेट की भलाई के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन जमीन पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। कहा कि झारखंड क्रिकेट की वास्तविक स्थिति कुछ और ही है।
नायक ने कहा की सुरक्षा चूक – बड़े मैचों में दर्शकों और खिलाड़ियों के लिए खतरा बना हुआ है। टिकट कालाबाज़ारी, नकली टिकट ने राज्य को कलंकित करने का कार्य किया है। ग्रामीण और आदिवासी प्रतिभाओं की उपेक्षा हो रही है, महिला और जूनियर क्रिकेट में गिरावट देखा जा रहा है। चयन प्रक्रिया अपारदर्शी और पक्षपातपूर्ण होने के आरोप लग रहे है। जिला क्रिकेट संरचना कमजोर है। अधिकांश जिलों में अकादमी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सिर्फ आज जेएससीए बयान देता है, लेकिन मैदान पर काम नहीं करता।
यह प्रणाली अब खिलाड़ियों और जनता के लिए खतरे का कारण बन गई है। कहा कि अगर हम अन्य राज्यों से तुलना करे तो खेल में झारखंड काफी पीछे खड़ा है। सिर्फ राज्य के अध्यक्ष अजयनाथ शाहदेव और उपाध्यक्ष संजय पांडेय बोल बच्चन की भूमिका निभा रहे है, जो चिंता का विषय है।
नायक ने राज्य सरकार को पत्र में उठाए गए मुद्दे के बारे जानकारी देते हुए जेएससीए की कार्यप्रणाली और चयन प्रणाली की उच्चस्तरीय जांच, जिला स्तर पर क्रिकेट अकादमी और मैदान निर्माण, स्टेडियम की सुरक्षा की तकनीकी समीक्षा, टिकट वितरण को डिजिटल और पारदर्शी बनाने, गरीब, आदिवासी मूलवासी और ग्रामीण खिलाड़ियों के लिए विशेष कार्यक्रम किए जाने की मांग की है। कहा कि झारखंड सरकार को अब यह समझना होगा कि यह केवल खेल नहीं, बल्कि झारखंड की अस्मिता का सवाल है।
उन्होंने बताया कि बीसीसीआई को भेजा गये पत्र में जेएससीए की लगातार लापरवाही पर बीसीसीआई ऑडिट जांच करने, चयन प्रक्रिया को डिजिटल और निगरानी योग्य बनाने, जिला क्रिकेट और टैलेंट हंट कार्यक्रम को व्यापक रूप से लागू करने, महिला और जूनियर क्रिकेट के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में युद्ध स्तर पर कार्य करने की मांग की है। कहा कि जेएससीए को जवाबदेह बनाया जाय। कहा कि झारखंड की प्रतिभा देश और दुनिया में चमक सकती है। बस सिस्टम बदलना होगा।
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