एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। मन में सपने, सच्ची लगन और अथक परिश्रम से सींचे जाएँ, तो वे केवल पूरे नहीं होते, मिसाल बन जाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरक मिसाल बने हैं टाटा स्टील के प्रधान अनुसंधान अधिकारी कौशल किशोर। जिन्हें बीते 5 दिसंबर को आईआईटी हैदराबाद में प्रतिष्ठित यंग मेटलर्जिस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया।
वर्तमान में एनएमएल, जमशेदपुर से पीएचडी कर रहे कौशल किशोर का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 50 से अधिक शोध प्रकाशन दर्ज हैं। यह उनके निरंतर शोध, नवाचार और वैज्ञानिक प्रतिबद्धता का सशक्त प्रमाण हैं। धातुकर्म के क्षेत्र में उनका योगदान आज देश ही नहीं, दुनिया में भी अपनी पहचान बना रहा है।

टाटा स्टील के प्रधान अनुसंधान अधिकारी कौशल किशोर को 5 दिसंबर को आईआईटी हैदराबाद में आयोजित समारोह में प्रतिष्ठित यंग मेटलर्जिस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके धातुकर्म (मेटलर्जी) के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रदान किया गया। एनएमएल जमशेदपुर से पीएचडी कर रहे कौशल किशोर के नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की 50 से अधिक शोध प्रकाशन दर्ज हैं।
झारखंड के एक छोटे से शहर से निकलकर आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में यह सम्मान प्राप्त करना कौशल के लिए सपनों के पूर्ण होने जैसा है। कभी आईआईटीयन बनने का सपना देखने वाले इस बालक ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा हजारीबाग जिला के हद में सीसीएल संबद्ध डीएवी विद्यालय पब्लिक स्कूल पुंडी, आरा (साढ़ूबेड़ा) के बाद डाल्टनगंज और बोकारो जिला के हद में डीएवी कथारा से प्राप्त की।

उपरोक्त स्थलों में उनके पिता के. के. झा बतौर खनन अधिकारी की तैनाती थे। ज्ञात हो कि कौशल के पिता के. के. झा सीसीएल कथारा क्षेत्रीय प्रबंधक खान सुरक्षा के पद से सेवानिवृत हो चुके है। कौशल के पिता केके झा के अनुसार डीएवी कथारा से वर्ष 2010 में बारहवीं पास करने के बाद कौशल ने बीआईटी सिंदरी से अभियांत्रिकी में स्नातक तथा आईआईटी बॉम्बे से वर्ष 2016 में परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की।
अपनी शैक्षणिक और व्यावसायिक यात्रा में उन्हें अनेक संस्थानों और अपनी कंपनी से कई पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं।
टाटा स्टील अधिकारी कौशल न केवल शोध और नवाचार में अग्रणी हैं, बल्कि युवा विद्यार्थियों को मार्ग दर्शन देने, ज्ञान साझा करने और उन्हें बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करने में भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। कौशल किशोर ने विज्ञान के आकाश में न केवल स्वयं को ऊँचाइयों तक पहुँचाया है, बल्कि विज्ञान के आकाश में टाटा स्टील का नाम भी और ऊँचा किया है।
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