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शिक्षा विभाग ने मांगों पर विचार नहीं किया तो फिर …?

9 दिसंबर को शीतकालीन सत्र के दौरान आंदोलन तय

प्रहरी संवाददाता/मुंबई। राज्य में शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारियों की समन्वय कमेटी के सभी घटक संगठनों ने शिक्षा भारती के वर्किंग प्रेसिडेंट सुभाष सावित्री किसान मोरे के मार्गदर्शन में डिप्टी डायरेक्टर ऑफ़ एजुकेशन के कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 5 दिसंबर को ज़रूरी TET और 15 मार्च, 2024 के गलत GR के खिलाफ स्कूल बंद होने के विरोध में हम सभी मजबूर होकर यह कदम उठाया है। हालांकि एजुकेशन डिपार्टमेंट ने स्कूल बंद होने के विरोध में हिस्सा लेने वाले शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारियों की एक दिन का वेतन कटने की चेतावनी दी है, लेकिन मुंबई में सभी शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारियों इंस्टीट्यूशन डायरेक्टर और प्रिंसिपल के संगठनों ने डिप्टी डायरेक्टर ऑफ़ एजुकेशन को मांगों का एक मेमोरेंडम सौंपा है।

गौरतलब है कि राज्य के सभी जिलों में 5 दिसंबर, 2025 को स्कूल बंद करने का विरोध किया जाएगा। इंस्टीट्यूशन डायरेक्टर, प्रिंसिपल, शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारियों
के सभी संगठन एक साथ विरोध में शामिल हुए हैं। सुभाष मोरे ने चेतावनी दी कि एजुकेशन डिपार्टमेंट इस आंदोलन पर तुरंत ध्यान देकर एजुकेशन क्वालिटी सुधारने और एडेड स्कूलों को बचाने के लिए एक्शन ले, नहीं तो 9 दिसंबर से विंटर सेशन के दौरान नागपुर में एक बड़ा आंदोलन किया जाएगा। इस आंदोलन में सीनियर सोशलिस्ट लीडर पूर्व टीचर MLA कपिल पाटिल, शिक्षा भारती के प्रेसिडेंट अशोक बेलसारे, वर्किंग प्रेसिडेंट सुभाष सावित्री किसन मोरे, संगठन के गिरीश सामंत, नॉन-टीचिंग स्टाफ संगठन के मुंबई प्रेसिडेंट देवीदास पंडागले, टीचर्स की मुंबई प्रेसिडेंट कल्पना शेंडे और सैकड़ों टीचर और नॉन-टीचिंग स्टाफ मौजूद थे।

Tegs: #If-the-education-department-did-not-consider-the-demands-then

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