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कॉलेज से लापता छात्रा का 44 दिन बाद कंकाल बरामद

वैशाली पुलिस की लापरवाही का शर्मनाक चेहरा उजागर

प्रहरी संवाददाता/हाजीपुर (वैशाली)। कॉलेज में पढ़ने गयी छात्रा के लापता होने के 44 दिन बाद उसका सड़ा गला कंकाल वैशाली पुलिस द्वारा बरामद किया गया। इस दौरान लापता छात्रा के लापता होने का मामला वैशाली जिले के दो थाना के बीच लटकता रहा।

जानकारी के अनुसार वैशाली जिला के हद में गोरौल थाने के पिरापुर मथुरा रहिवासी वीर चंद्र सिंह की पुत्री जिला के हद में भगवानपुर स्थित लक्ष्मी नारायण महाविद्यालय में स्नातक तृतीय खंड की छात्रा थी। वह गत 27 मई को कॉलेज जाने के बाद घर नहीं लौटी। अपनी पुत्री के घर नहीं लौटने के बाद पिता ने आसपास के क्षेत्र और संबंधियों के यहां खोज की, लेकिन पुत्री का पता नहीं चलने पर सिंह ने दूसरे दिन 28 मई को अपनी पुत्री की गुमशुदगी का रिपोर्ट लिखाने गौरोल थाना गए। बताया जाता है कि गोरौल थाने की पुलिस ने उन्हें यह कह कर लौटा दिया कि कॉलेज भगवानपुर थाना क्षेत्र में है।

आपकी पुत्री कॉलेज से गायब हुई है, इसलिए गुमशुदगी का रिपोर्ट भगवानपुर थाना में दर्ज कराए। इसके बाद सिंह अपनी पुत्री की गुमशुदगी का रिपोर्ट दर्ज करने भगवानपुर थाना गए। पीड़ित के अनुसार भगवानपुर थाने की पुलिस ने घर गोरौल थाना में होने की बात कही। कहा कि घटना गोरौल थाना की है, वही रिपोर्ट दर्ज होगा।

इस तरह जब पुलिस ने उनकी पुत्री की गुमशुदगी का रिपोर्ट दर्ज नहीं किया, तब वीर चंद्र सिंह वैशाली जिला मुख्यालय हाजीपुर स्थित एसपी कार्यालय में आकर अपनी पुत्री की गुमशुदगी का रिपोर्ट दर्ज करने वास्ते आवेदन किया। आश्चर्य यह कि फिर भी किसी थाने में रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। थक हार कर सिंह ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) हाजीपुर के समक्ष अपनी पुत्री के अपहरण की आशंका जताते हुए परिवाद पत्र दायर किया। सीजेएम के आदेश से परिवाद गोरौल थाना जांच के लिए भेजा गया, लेकिन थाने ने कोई कार्रवाई नहीं की।

ज्ञात हो कि छात्रा की गुमशुदगी की चर्चा आसपास के क्षेत्र में भी काफी रही तथा पीड़ित वीरचंद सिंह और उनके परिवारजन लापता बच्ची का पता लगाने के लिए भाग दौड़ करते रहे। इस बीच बीते 10 जुलाई को मकई के खेत से सड़े हुए दुर्गंध की सूचना मिलने पर आसपास के रहिवासी जुट गए और इसकी सूचना स्थानीय थाने को भी दी गई। जब मिट्टी खोदकर देखा गया तो गड्ढे में सिर्फ कंकाल पड़ा था। उक्त गड्ढे में ही लापता छात्रा का स्कूल बैग और उसका आई कार्ड प्राप्त हुआ, जिसके आधार पर पीड़ित ने अपनी पुत्री के शव का पहचान किया।

घटना की सूचना मिलते ही गोरौल थाने की पुलिस घटनास्थल पर पहुंची, लेकिन स्थानीय रहिवासियों का पुलिस के खिलाफ काफी आक्रोश था। घटनास्थल पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी महुआ भी पहुंची और गढ़े से खोदकर कंकाल को निकाला गया। गड्ढे से बरामद सामान का पंचनामा तैयार कर कंकाल को पोस्टमार्टम के लिए हाजीपुर सदर अस्पताल भेजा गया, लेकिन जैसा कि जानकारी मिली है कि कंकाल के पोस्टमार्टम की सुविधा हाजीपुर सदर अस्पताल में नहीं है।

इसलिए 11 जुलाई को उक्त छात्रा के कंकाल को पोस्टमार्टम के लिए पीएमसीएच पटना भेजा गया है। इस संबंध में परिजनों ने न सिर्फ थाना की पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया है, बल्कि पुलिसिया तंत्र की सड़े गले सिस्टम को भी उजागर किया है। ग्रामीणों ने पुलिस को जमकर भला-बुरा कहा। अब बेशर्म वैशाली पुलिस ने कंकाल मिलने पर मामला दर्ज किया है। पुलिस अब परिजन को जांच करने का आश्वासन दे रही हैं, लेकिन क्या फायदा बेटी तो जिन्दा वापस होगी नहीं। स्थानीय एक ग्रामीण ने कहा कि यदि किसी नेता या साहब का कुत्ता खो जाता है तो पुलिस चंद घंटों में खोज लेती है, लेकिन यदि किसी गरीब का बेटा या बेटी खो जाय तो पुलिस रिपोर्ट लिखाने में इतना दौड़ाती है कि थक हार कर अपने आप परिजन बैठ जाते हैं।

 

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