प्रहरी संवाददाता/बोकारो थर्मल (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में बेरमो तथा नावाडीह प्रखंड के सीमा क्षेत्र के बैदकारों क्षेत्र में फैला यह हरियाली से भरा जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं है। यह हमारी सांस्कृतिक, प्राकृतिक और जीविका की जीवन रेखा है। यहाँ की मिट्टी में हमारे पूर्वजों की यादें हैं, इन पेड़ों की छांव में हमारी मांओं की ममता है, और इन झाड़ियों में हमारी आने वाली पीढ़ियों की सांसें बसी हुई हैं।
यह उदगार बैद्यकारो की दर्जनों महिलाओं की है। रहिवासी महिलाओं के अनुसार दु:ख की बात है कि आज इस जंगल पर कुल्हाड़ी चलाने की तैयारी हो रही है। बताया गया कि सीसीएल बीएंडके प्रबंधन के अधीन टेंडर लिया गया है और इसके पीछे कथित रूप से जितेंद्र महतो है जिसे मास्टरमाइंड कहा जा रहा है की भूमिका है।
रहिवासियों के अनुसार इस योजना का असली चेहरा सामने तब आया, जब जंगल कटवाने की कोशिश में ठेकेदार द्वारा भेजा हुआ मजदूर बैदकारों के जंगल में जा पहुंचा। लेकिन इस बार जंगल अकेला नहीं था। बैदकारों की माताएं, बहनें, गाँव की वीर महिलाएं मोर्चा बनाकर सीना तान कर खड़ी हो गईं। उन्होंने नारे लगाए, आंसुओं और आवाज़ों से जंगल की पुकार को प्रशासन तक पहुंचाया। उन्होंने साफ लफ्जो में कहा कि हम अपने बच्चों का भविष्य नहीं कटने देंगे। यह जंगल हमारी माँ है। इसे किसी ठेके या टेंडर से नहीं बेचा जा सकता।
महिलाओं के अनुसार आज यह सिर्फ एक आंदोलन नहीं है। यह एक संघर्ष है, आत्मा और लालच के बीच, पर्यावरण और मुनाफे के बीच, जीवन और विनाश के बीच। कहा कि हम सभी से अपील करते हैं कि जंगल कटने से रोकिए। महिला मोर्चा का साथ दीजिए। जितेंद्र महतो जैसे कथित समाज बिगाडू के खिलाफ आवाज़ उठाइए।
प्रशासन से गुहार लगाइए कि इस टेंडर को रद्द किया जाए। यह जंगल रहेगा, तो हमारा गाँव जिंदा रहेगा। यह पेड़ रहेंगे, तो हमारी सांसें चलेंगी। यह धरती रहेगी, तो जीवन रहेगा। अब फैसला हमें करना है। क्या हम आने वाली पीढ़ियों को एक सूखा हुआ रेगिस्तान देंगे, या यह हरियाली, जो उनके लिए भी सांस बन सके? बचाओ इस जंगल को, क्योंकि यह सिर्फ जंगल नहीं, हम सभी का जीवन है।
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