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बैंक व् बीमाकर्मियों द्वारा राष्ट्रव्यापी हड़ताल को समर्थन, निजीकरण व् श्रम सुधारों का विरोध

रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। सेन्ट्रल ट्रेड यूनियनों द्वारा 9 जुलाई को राष्ट्रव्यापी हड़ताल के समर्थन में बैंक और बीमा सेक्टर के कर्मचारियों ने पूर्ण हड़ताल कर कामकाज ठप कर दिया। बैंक शाखाओं और बीमा कार्यालयों में ताले लटके रहे, वहीं कर्मचारियों ने शाखा के सामने प्रदर्शन करते हुए केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

जानकारी के अनुसार ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन (एआईबीईए), बीईएफआई, एआईआईईए, जीआईईएआईए, एआईएलआईसीईएफ जैसे संगठनों के बैनर तले कर्मचारी एकजुट दिखे। हड़ताली कर्मचारियों का कहना था कि जन विरोधी श्रम सुधार, बैंकिंग सुधार और बैंकों के निजीकरण की नीति से आम जनता की जमा पूंजी खतरे में पर रही है।

कर्मचारियों ने अपनी प्रमुख मांगों में श्रम सुधार कानूनों को रद्द किया जाए, बैंकों का निजीकरण रोका जाए, बैंकों में आउटसोर्सिंग पर रोक लगे, पुरानी पेंशन स्कीम बहाल की जाए, सेवा शुल्क समाप्त किया जाए, जान बूझकर कर्ज न चुकाने वालों पर आपराधिक मुकदमा हो, कॉरपोरेट ऋण डिफॉल्टर्स की सूची सार्वजनिक होना बताया। प्रदर्शन में महिला कर्मचारियों की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही।

मौके पर यूनियन के नेताओं ने कहा कि एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स) की समस्या को गहराते देख सरकार को चाहिए कि वह सख्त कानून बनाए, न कि बैंकों को निजी पूंजीपतियों के हवाले करे। दिलीप झा के नेतृत्व में इस हड़ताल को सफल बनाने में राजेश कुमार ओझा, राजेश श्रीवास्तव, विभाष झा, राकेश मिश्रा, सुजाता कुमारी, ममता रावत समेत सैकड़ों बैंक कर्मी दिनभर सक्रिय रहे और हड़ताल स्थल पर डटे रहे।

 

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