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सप्त मातृकाओं की भक्ति में रमा सोनपुर का ग्रामीण इलाका

शीतला माता सहित सात बहन और भाई भैरों की पूजा की मची है धूम

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सोनपुर अंचल का संपूर्ण इलाका सप्त मातृकाओं की भक्ति में रम गया है। आषाढ़ और श्रावण महीने में होने वाली मैया शीतला भवानी सहित सात बहनों की पूजा का सिलसिला शुरु है। श्रावण माह के प्रथम सप्ताह तक सिलसिला चलेगा।

सबलपुर हस्ती टोला स्थित देवी स्थान पर हजारों नर -नारियों की उपस्थिति में देवी भक्त बृजनंदन भगत ने अपने नंगे हाथों से उबलते खीर को चलाकर उफनते फेन सहित गर्म दूध का भक्तों पर छिड़काव किया। देवी माता के इस आशीर्वाद को ग्रहण करने के लिए भक्तों का जन सैलाब उमड़ आया। इसे लेकर 7 जुलाई को सबलपुर बभनटोली में देवी पूजा है, जिसके लिए देवी जागरण 6 जुलाई को रात भर चला।

मानर की थाप एवं देवी गीतों के बीच भगवती और ब्रह्म की इस पूजा को देखने और उसमें शामिल होने के लिए सारण, वैशाली और पटना जिले से हजारों की संख्या में भक्तगण आए थे। मातृ शक्तियों की ऐसी आराधना अन्यत्र कहीं दुर्लभ है। जिसका वजह यह बताया जाता है कि यह सिद्ध भगवती स्थान है और सप्तमातृकाएं यहां अपने भक्त यानि भगत के माध्यम से भक्तों का कल्याण करने आती हैं। उनके कष्टों का निवारण करती हैं।

सप्त मातृकाओं में देवी शीतला का नाम सर्वोपरि है। इनके साथ इनकी अन्य छह बहनें भी मिट्टी की पिंडी के रूप में मंदिर के गर्भ गृह मे स्थापित हैं। सभी देवियां भक्तों के दैहिक, दैविक और भौतिक तापों का हरण करनेवाली रोग निरोधक देवी हैं। बरसात के सभी रोगों के निदान में देवियों के आशीर्वाद से धरती पर दूर -दूर तक फैली नीम वृक्ष, उसकी डाली और उसके पत्तों को स्वास्थ्य रक्षक माना जाता है।

इन देवियों की नीम की डाली झूला, माली परिवार इनका जन्मजात भक्त। आज की बोली में कहें तो तापजनित, कष्टकारक चेचक सहित तमाम व्याधियों को निर्मूल कर बीमार तन को शीतल करनेवाली सात बहन शीतला माता हैं।

इन सप्त मातृकाओं की यहां होती है पूजा

भगवती स्थान, मईया स्थान, देवी स्थान, महारानी स्थान या सप्त मातृका स्थान के नाम से प्रसिद्ध इस मंदिर के गर्भगृह में देवी के सात पिंडियों की पूजा होती है। मंदिर के बाहर भैरों नाथ की पिंडी है। ये सभी गांव हो या नगर आकस्मिक विपत्तियों से सभी को बचाते हैं। इनमें शीतला माता, बड़की माई, कलाकारिणी माई, बायसी माई,
पन्साहा माई, कोदई माई एवं जगतारिणी माई शामिल हैं।

लगातार हवन से हुआ पर्यावरण प्रदूषण से मुक्ति

मंदिर के बाहर एक विशाल हवन कुंड के पास कई टन घी मिश्रित हुमाद का पहाड़ इकट्ठा था। लगातार हवन चल रहा था। भक्तों के लाए शुद्ध घी मिश्रित हुमाद से हो रहे हवन से सम्पूर्ण वातावरण पवित्र और सुगंधित हो गया।

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